
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में महीनों तक चले सियासी घमासान और कड़े चुनावी संघर्ष के बाद बीजेपी ने आख़िरकार राज्य की सत्ता का ताज शुभेंदु अधिकारी के सिर पर सजाने का फैसला कर लिया है। कोलकाता में आयोजित बीजेपी विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है, जिसके साथ ही यह साफ हो गया है कि वह पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
इसे भी पढ़ें- शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या, घात लगाकर बैठे हमलावरों ने रोकी SUV और कर दी अंधाधुंध फायरिंग, बंगाल में तनाव
इन्हें बनाया डिप्टी सीएम
पार्टी ने राज्य की कमान संभालने के लिए न केवल शुभेंदु पर भरोसा जताया है, बल्कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधते हुए अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक को उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाने का भी ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होने वाला यह सत्ता परिवर्तन बंगाल की राजनीति में दशकों बाद आए सबसे बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी अब भाजपा के हाथों में है और पार्टी ने इसे संभालने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी योद्धा शुभेंदु अधिकारी को चुना है।

शुक्रवार को कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की बैठक में केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में शुभेंदु के नाम पर मुहर लगी। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद थे, जिन्होंने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि, बंगाल की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और सुशासन पर अपनी मुहर लगाई है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह जीत उन 321 देवतुल्य कार्यकर्ताओं के बलिदान का परिणाम है, जिन्होंने पार्टी की विचारधारा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि अब गंगा से लेकर गंगासागर तक बीजेपी की सरकार है और पार्टी को अब बेहद विनम्रता के साथ जनता की सेवा की जिम्मेदारी निभानी होगी।
कल पेश करेंगे दावा
शुभेंदु अधिकारी आज शाम ही राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करेंगे। मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम तय होना पहले से ही लगभग निश्चित माना जा रहा था, क्योंकि उन्होंने न केवल तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य किले को ढहाया, बल्कि ममता बनर्जी के खुद के गढ़ भाबानीपुर से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाया।
शुभेंदु के पास राज्य सरकार में मंत्री के रूप में काम करने का लंबा प्रशासनिक अनुभव है और उनकी बंगाल की जमीनी राजनीति पर गहरी पकड़ है, यही कारण है कि आलाकमान ने कई वरिष्ठ नामों पर चर्चा के बाद भी उनके चेहरे पर दांव लगाना सबसे उचित समझा। शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां भी जोरों पर हैं।
शनिवार सुबह 10 बजे, जब पूरा बंगाल रवींद्र जयंती का उत्सव मना रहा होगा, उसी पावन अवसर पर कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह को भव्य बनाने के लिए इसे पूरी तरह से बंगाली संस्कृति और रंगों में रंगा जा रहा है। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेता कोलकाता पहुंच रहे हैं।
20 राज्यों के सीएम भी होंगे शामिल
इतना ही नहीं, बीजेपी और एनडीए शासित 20 राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस समारोह में शामिल होकर बंगाल में कमल खिलने के जश्न में शरीक होंगे। सरकार के गठन में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। अग्निमित्रा पॉल ने आसनसोल दक्षिण सीट से 1 लाख 19 हजार से अधिक वोट पाकर शानदार जीत दर्ज की है।
उन्होंने अपनी सीट पर 40 हजार से अधिक मतों के अंतर से विपक्षी दलों को शिकस्त दी। वहीं, निसिथ प्रमाणिक ने उत्तर बंगाल की माथाभांगा सीट से प्रचंड जीत हासिल की है, जहां उन्हें 1 लाख 43 हजार से ज्यादा वोट मिले। इन दोनों नेताओं को डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी ने दक्षिण और उत्तर बंगाल के बीच एक मजबूत सियासी पुल बनाने की कोशिश की है। मंत्रिमंडल की संभावित सूची पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में अनुभव और युवा ऊर्जा का मिश्रण देखने को मिलेगा। दिलीप घोष, जिन्होंने राज्य में पार्टी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई, उनके साथ ही शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, जितेंद्र तिवारी और शरदवत मुखर्जी जैसे कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा, नीलाद्रि शेखर, प्रणत टुडू, रुद्रनील घोष, दुधकुमार मंडल और बंकिम घोष भी मंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
टीएमसी छोड़कर आये थे बीजेपी में
माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के चयन में हर वर्ग और हर जिले का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा ताकि ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प को धरातल पर उतारा जा सके। शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी रहे शुभेंदु ने जिस तरह से बीजेपी में शामिल होकर पूरी चुनावी पटकथा बदल दी, उसने उन्हें पार्टी के भीतर और बाहर एक बड़े कद के नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। उनकी कार्यशैली और आक्रामक चुनाव प्रचार ने बंगाल के मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को बीजेपी की ओर आकर्षित किया। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने की होगी।
अमित शाह ने अपने संबोधन में जिस तरह से हिंसा के बीच मिले प्रचंड जनादेश का जिक्र किया, उससे साफ है कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता शांति व्यवस्था कायम करना होगी। राज्य की जनता ने जिस उम्मीद के साथ बीजेपी को सत्ता सौंपी है, उसे पूरा करने के लिए शुभेंदु और उनकी टीम को पहले दिन से ही कड़े फैसले लेने होंगे।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में कल होने वाला शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक नई सरकार की शुरुआत होगी, बल्कि यह बंगाल की नई राजनीतिक दिशा और दशा को भी तय करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास के लिए अब पूरी ताकत झोंकने वाली है। अगले कुछ घंटे बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।
इसे भी पढ़ें- बंगाल चुनाव नतीजे पर बरसे अखिलेश, बोले- ‘ये मतगणना नहीं मनगणना है’, प्रक्रिया पर उठाए सवाल



