मिशन 2027: बीजेपी का 49 सीटों का प्लान, सपा की भी नजर, सफल होने वाला ही होगा यूपी का अगला CM!

लखनऊ। पश्चिम बंगाल के हालिया घटनाक्रमों और वहां बीजेपी के बढ़ते उत्साह के बीच अब देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश में 2027 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। बंगाल के नतीजों ने जहां भाजपा के कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका है, वहीं समाजवादी पार्टी के लिए अपनी किलेबंदी को और मजबूत करने की चुनौती खड़ी कर दी है। इस महामुकाबले के लिए दोनों ही दलों ने अपनी रणनीतियों की धार तेज कर दी है और उनका पूरा ध्यान अब उन 49 सीटों पर केंद्रित हो गया है, जहां 2022 के चुनाव में जीत-हार का फैसला बहुत ही मामूली अंतर से हुआ था।

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जीत-हार का था बारीक अंतर

राजनीति के जानकारों का मानना है कि, जो भी दल इन फंसी हुई सीटों के सामाजिक और सियासी समीकरणों को साधने में सफल रहेगा, 2027 की सत्ता की चाबी उसी के पास होगी।

UP 2027

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक-एक वोट की कीमत क्या होती है, यह 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों से साफ पता चलता है। राज्य की कुल 403 सीटों में से 49 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत और हार का फासला 5000 वोटों से भी कम का था। यह आंकड़ा रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इन सीटों पर थोड़ा सा भी वोट स्विंग या सामाजिक समीकरण का बदलाव नतीजों को पूरी तरह पलट सकता है। भाजपा और सपा दोनों ही इस हकीकत से वाकिफ हैं, इसीलिए इन क्षेत्रों में अभी से बूथ स्तर पर घेराबंदी शुरू कर दी गई है। इन 49 सीटों पर हार-जीत के बारीक अंतर का आलम यह था कि कई जगह तो जीत महज 100 से 500 वोटों के बीच सिमट कर रह गई।

इन चुनौतीपूर्ण सीटों के विश्लेषण पर नजर डालें, तो बहराइच सदर सीट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां भाजपा की अनुपमा जायसवाल ने मात्र 407 वोटों के बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। इसी तरह, मऊ की मधुबन सीट पर तो मुकाबला इतना कांटे का था कि जीत-हार का अंतर मात्र 293 वोट रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक ऐसी कई सीटें हैं, जहां मतदाताओं ने दोनों दलों को लगभग बराबरी पर ला खड़ा किया था। फरीदपुर में 292 वोट, सीतापुर में मात्र 125 वोट और सलोन में 211 वोटों के अंतर ने यह साबित कर दिया कि, यहां किसी भी लहर से ज्यादा स्थानीय ‘मैनेजमेंट और जातियों का गठजोड़ काम आया था।

खेल बिगाड़ सकते हैं निर्दलीय उम्मीदवार

समाजवादी पार्टी के लिए छिबरामऊ जैसी सीटें उम्मीद की किरण हैं, जहां अरविंद सिंह यादव ने भाजपा की अर्चना पांडेय को 1118 वोटों से मात दी थी। वहीं, भाजपा के लिए इटावा और अलीगंज जैसी सीटें साख का सवाल हैं, जहां सरिता भदौरिया और सत्यपाल सिंह राठौर ने सपा के दिग्गजों को 4000 से कम वोटों के अंतर से हराया था। प्रयागराज की हंडिया, जालौन की कालपी और रायबरेली की बछरावां जैसी सीटों पर भी दोनों दलों के बीच जो सिर फुटव्वल देखने को मिली थी, उसका अंतर महज 100 से 400 वोटों के बीच था। यह वह इलाका है जहां छोटी पार्टियां या निर्दलीय उम्मीदवार भी बड़े दलों का खेल बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।

UP 2027

2027 की तैयारी के लिए भाजपा ने अपनी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। पार्टी उन सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां वह बहुत कम अंतर से हारी थी या जहां जीत का मार्जिन बहुत कम था। इसके लिए बूथ सशक्तिकरण अभियान के जरिए पन्ना प्रमुखों को यह जिम्मेदारी दी जा रही है कि वे उन परिवारों तक पहुंचे जिन्होंने पिछली बार वोट नहीं दिया था या जो विपक्ष के पाले में चले गए थे। भाजपा का मानना है कि बंगाल की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ उसे यूपी में भी मिलेगा, लेकिन वह अति-उत्साह में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

जमीन कार्यकर्ताओं को किया जा रहा लामबंद

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इन 49 सीटों को लेकर बेहद गंभीर हैं। सपा की रणनीति इन क्षेत्रों में अपने सामाजिक समीकरण पीडीए को और गहराई तक ले जाने की है। सपा उन गलतियों की शिनाख्त कर रही है, जिनकी वजह से 150 से 850 वोटों के अंतर वाली सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। बिसौली, दिबियापुर, डुमरियागंज, और गाजीपुर जैसी सीटों पर हार-जीत का जो अत्यंत कम मार्जिन रहा, उसे पाटने के लिए सपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से लामबंद कर रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों जैसे बारौत, नकुड़ और किठौर में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था। यहां किसान राजनीति और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच के बारीक अंतर ने नतीजों को प्रभावित किया था। नकुड़ में महज 315 वोटों के अंतर ने यह साफ कर दिया कि, यहां मतदाता आखिरी समय तक बंटे हुए थे।

2027 के चुनाव में इन सीटों पर जीत का स्वाद चखने के लिए दोनों ही दल अब नए चेहरों और प्रभावी स्थानीय गठबंधनों की तलाश में हैं, जो दल इन 49 सीटों के जादुई आंकड़े को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रहेगा। वही लखनऊ की गद्दी का असली हकदार बनेगा।

 

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