बिना तैयारी बैठक में आए अधिकारी, तो भड़क गए सीएम धामी, लगा दी क्लास

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और नौकरशाही के गलियारों में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक अलग ही तेवर में नजर आए। सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक महज एक रूटीन मीटिंग बनकर नहीं रही, बल्कि यह लापरवाह अधिकारियों के लिए क्लास में तब्दील हो गई।

इसे भी पढ़ें- देवभूमि में बही भक्ति की बयार, सीएम धामी ने सेलाकुई में मां भगवती के चरणों में टेका मत्था

हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री ने बैठक में बिना तैयारी के पहुंचे अफसरों को न केवल कड़ी फटकार लगाई, बल्कि साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनता से जुड़ी घोषणाओं में किसी भी तरह की हीलाहवाली अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धामी के इस सख्त रुख ने सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक के अधिकारियों को सकते में डाल दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि, सरकार की प्राथमिकता केवल फाइलें घुमाना नहीं, बल्कि धरातल पर काम करना है और जो अधिकारी इसमें बाधा बनेंगे, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

cm dhami

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक की शुरुआत में ही अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पाया कि, कई वरिष्ठ अधिकारी महत्वपूर्ण घोषणाओं की प्रगति रिपोर्ट के साथ पूरी तैयारी से नहीं आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं और इन बैठकों में तथ्यों की कमी या अधूरी जानकारी लेकर आना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

सभी विभागों के सचिवों को निर्देश

उन्होंने दो टूक कहा कि, भविष्य में यदि कोई भी अधिकारी बिना होमवर्क और तथ्यात्मक जानकारी के बैठक में उपस्थित हुआ, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। धामी ने विकास कार्यों की गति धीमी होने के पीछे विभागों के बीच समन्वय की कमी को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि, एक विभाग दूसरे पर फाइल टाल देता है, जिससे जनता के हित के प्रोजेक्ट लटक जाते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सिस्टम की नाकामी बताते हुए निर्देश दिए कि, आपसी तालमेल के अभाव में अब एक भी काम लंबित नहीं रहना चाहिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के सचिवों को कड़ा निर्देश दिया कि वे 15 जून तक का समय लें और जितनी भी लंबित घोषणाएं हैं, उनके शासनादेश अनिवार्य रूप से जारी कर दें। उन्होंने साफ किया कि, वह 15 जून से पहले दोबारा समीक्षा बैठक करेंगे और तब तक उन्हें हर हाल में प्रगति देखनी है।

मुख्यमंत्री ने सचिवों को अपने-अपने विभागों की घोषणाओं की गहन स्क्रूटनी करने को कहा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी फाइलों में दबी पड़ी हैं। धामी का यह तेवर बताता है कि वे अब एक्शन मोड में हैं और चुनावी वादों व जनहित की योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

शिलापट्ट न लगाए जाने पर नाराजगी

मुख्यमंत्री की नाराजगी का एक बड़ा कारण शिलापट्ट न लगाया जाना भी रहा। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि, कई क्षेत्रों में काम तो शुरू हो गया है या पूरा होने को है, लेकिन वहां शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने इसे जनता के सूचना के अधिकार और सरकारी पारदर्शिता के खिलाफ माना। मुख्यमंत्री ने इसके लिए सीधे तौर पर जिलाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और निर्देश दिए कि यदि किसी कार्यस्थल पर कार्य का विवरण देने वाला शिलापट्ट नहीं मिला, तो संबंधित जिलाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक खामी की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर हल होने वाली छोटी-छोटी समस्याओं और फाइलों को अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर भेजा जा रहा है, जिससे सचिवालय का बोझ बढ़ रहा है और समय की बर्बादी हो रही है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि समस्याओं का समाधान उसी स्तर पर किया जाए जहां वे पैदा हुई हैं।

cm dhami

बैठक में चार प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर और जागेश्वर की लगभग 150 से अधिक विकास योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र की कुल 90 घोषणाओं की प्रगति देखते हुए मुख्यमंत्री ने संतोष तो जताया कि, अधिकांश के शासनादेश जारी हो गए हैं, लेकिन उन्होंने पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे बुनियादी विभागों से जुड़े लंबित मामलों में तत्काल तेजी लाने को कहा।

 अधिकारियों को दिया 15 दिन का समय

इसी तरह, सल्ट विधानसभा क्षेत्र की 69 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने पर्यटन, ग्राम्य विकास और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि धरातल पर काम की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार दिखना चाहिए। रानीखेत और जागेश्वर के धार्मिक व सामरिक महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वहां की 33 घोषणाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा, विशेषकर जागेश्वर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भुनाने के लिए योजनाओं को जल्द से जल्द मूर्त रूप देने का आदेश दिया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, सल्ट, रानीखेत और जागेश्वर के विधायकगणों के साथ मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा, जिस पर धामी ने अधिकारियों को तुरंत समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का यह रौद्र रूप उत्तराखंड की नौकरशाही के लिए एक बड़ा संदेश है कि अब पुरानी ढर्रे वाली कार्यप्रणाली नहीं चलेगी। 15 जून की समय सीमा अधिकारियों के लिए एक अग्निपरीक्षा की तरह है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस हंटर के बाद उत्तराखंड में विकास की फाइलों पर जमी धूल कितनी जल्दी साफ होती है और जनता को इन घोषणाओं का लाभ कब तक मिलता है।

 

इसे भी पढ़ें-  सबसे बड़े श्रीयंत्र के दर्शन करने डोल आश्रम पहुंचे CM धामी ने किया 1100 कन्याओं का पूजन

Related Articles

Back to top button