क्या दुनिया के नक़्शे से खत्म हो जाएगा ईरान, होर्मुज में शुरू हुआ मिनी वॉर, समुद्र में मंडरा रहे ड्रोन और मिसाइलें

 वॉशिंगटन। दुनिया की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा कहे जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में इस वक्त बारूद की गंध फैली हुई है। फरवरी 2026 में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद भड़की आग अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से वापसी का रास्ता नजर नहीं आता। समंदर की लहरों पर मिसाइलें और ड्रोन मंडरा रहे हैं, तो वहीं अमेरिकी नौसेना का प्रोजेक्ट फ्रीडम ईरानी नौसेना की घेराबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

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आसमान छू रहीं तेल की कीमतें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मिनी वॉर करार दिया है, लेकिन दुनिया के लिए यह मिनी वॉर किसी वैश्विक तबाही से कम नहीं है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और सवाल यह है कि इस दबदबे की जंग में जीत किसकी होगी? क्या अमेरिका और इजरायल किसी ऐसे सरप्राइज अटैक की तैयारी में हैं जो ईरान के वजूद को ही संकट में डाल देगा?

A mini war broke out in Hormuz.

मध्य पूर्व में चल रहा यह संकट आज इतिहास के सबसे काले दौर में पहुंच गया है। इस तनाव की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। उस हमले में ईरान के सबसे ताकतवर नेता और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसने पूरे ईरान को गुस्से और बदले की आग में झोंक दिया।

ईरान ने इसके जवाब में न सिर्फ इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की बारिश की, बल्कि सबसे खतरनाक कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया। यह रास्ता कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, दुनिया का करीब 25 प्रतिशत तेल व्यापार इसी संकरे रास्ते से होता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी समुद्री मार्ग पर टिकी है।

पीछे हटने को मजबूर हुए अमेरिकी बेड़े

मई 2026 की शुरुआत के साथ ही स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। 4 मई को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स से हमला कर दिया। ईरान का दावा है कि, उसने अमेरिकी बेड़े को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन वॉशिंगटन ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की जानकारी दी है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि, उनकी नौसेना ने ईरान की 7 फास्ट अटैक बोट्स को समंदर में डुबो दिया है। इस झड़प के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एक बेहद सख्त संदेश जारी किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिकी संपत्तियों या जहाजों को निशाना बनाया, तो उसे धरती से मिटा दिया जाएगा। ट्रंप की यह भाषा बताती है कि, अमेरिका अब किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है, हालांकि वे एक पूर्ण युद्ध में फंसकर अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों को और ज्यादा चोट नहीं पहुंचाना चाहते।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की रणनीति को एसिमेट्रिक वॉरफेयर यानी छापामार युद्ध कहा जा सकता है। ईरान जानता है कि पारंपरिक युद्ध में वह अमेरिकी नौसेना का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए वह छोटी नावों, समुद्री बारूदी सुरंगों यानी माइन्स और संकरे रास्ते का फायदा उठा रहा है।

ईरान ने समुद्र में बिछाई माइन्स

ईरान ने समंदर के नीचे सैकड़ों माइन्स बिछा दी हैं, जिससे सैकड़ों कमर्शियल जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों को निकालने के लिए अमेरिका ने ऑपरेशन लिबर्टी या प्रोजेक्ट फ्रीडम लॉन्च किया है। इसके तहत हजारों अमेरिकी नौसैनिक और लड़ाकू विमान इन फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए तैनात किए गए हैं। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है, क्योंकि ईरान के पास हिज्बुल्लाह, हूती और इराकी मिलिशिया जैसे घातक प्रॉक्सी ग्रुप्स हैं, जो हर तरफ से अमेरिका और इजरायल की घेराबंदी कर रहे हैं।

A mini war broke out in Hormuz.

विशेषज्ञों का मानना है कि, इस दबदबे की लड़ाई में असली मार आम इंसान की जेब पर पड़ रही है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 300 से 370 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसका मतलब है कि, एशिया के विकासशील देश और गरीब राष्ट्र पूरी तरह से आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएंगे। चीन और रूस जैसे देश इस संकट में ईरान के साथ खड़े तो नजर आते हैं, लेकिन वे भी खुलकर युद्ध के मैदान में नहीं उतरना चाहते क्योंकि वैश्विक व्यापार ठप होने से उन्हें भी भारी नुकसान हो रहा है।

इस बीच, पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है और पर्दे के पीछे सीजफायर यानी युद्धविराम की बातचीत चल रही है। ट्रंप प्रशासन के सामने इस वक्त दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह है कि, वे ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाइल अड्डों पर फिर से भारी हवाई हमले करें और उसे पूरी तरह घुटनों पर ले आएं।

 सरप्राइज अटैक का प्लान बना रहे यूएस-इजराइल!

दूसरा रास्ता यह है कि, वे कूटनीति के जरिए ईरान को होर्मुज खोलने के लिए मजबूर करें और बदले में कुछ प्रतिबंधों में ढील दें, लेकिन ईरान की मांग है कि जब तक अमेरिका इस क्षेत्र से पूरी तरह बाहर नहीं निकलता, वह रास्ता नहीं खोलेगा। यह गतिरोध एक ऐसी डेडलॉक स्थिति पैदा कर रहा है, जो किसी भी पल एक महाविनाशक युद्ध में तब्दील हो सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसी सैकड़ों जिंदगियां और हजारों टन कच्चा तेल आज वैश्विक राजनीति का बंधक बन चुका है। ईरान ने जिस तरह से इस जलडमरूमध्य को हथियार बनाया है, उसने आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदल दी है। अब देखना यह होगा कि, क्या ट्रंप अपने मिनी वॉर को खत्म करने के लिए किसी बड़े धमाके यानी सरप्राइज अटैक का सहारा लेते हैं या फिर दुनिया को इस भीषण महंगाई और ईंधन की कमी से बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकलता है।

फिलहाल, समंदर में बारूद की गंध और आसमान में मंडराते फाइटर जेट्स इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि मध्य पूर्व की शांति एक बहुत ही कच्चे धागे से बंधी हुई है। एक छोटी सी चूक और पूरी दुनिया महायुद्ध की आग में झुलस सकती है।

 

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