
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वीवीआईपी और संवेदनशील इलाकों में शुमार महानगर क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने शहरी समाज और अपार्टमेंट संस्कृति के बीच छिपे रंजिश के खतरनाक चेहरे को बेनकाब कर दिया है। महानगर स्थित एल्डिको बसेरा अपार्टमेंट में रहने वाले हाईकोर्ट के एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता पर उनके ही पड़ोसी ने जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।
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पड़ोसी ने किया फॉर्च्यूनर चढ़ाने का प्रयास
आरोप है कि, रसूखदार होने का दावा करने वाले पड़ोसी ने वकील के ऊपर अपनी भारी-भरकम फॉर्च्यूनर एसयूवी चढ़ाने की कोशिश की ताकि उन्हें रास्ते से हटाया जा सके। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत हमले का है, बल्कि यह उस सामंती मानसिकता को भी है, जहां सत्ता और संबंधों के दम पर कानून को हाथ में लेना आम बात समझी जाने लगी है। लखनऊ पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन अपार्टमेंट के भीतर रहने वाले परिवारों में इस घटना के बाद से गहरा खौफ व्याप्त है।
बताया जा रहा है कि, पीड़ित वकील अभिषेक तिवारी, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में वकालत करते हैं, हमेशा की तरह अपना काम निपटाकर देर रात घर लौटे थे। 30 अप्रैल की रात करीब 11:55 बजे जब वह अपने ड्राइवर गोविंद के साथ अपनी एमजे हेक्टर गाड़ी से एल्डिको बसेरा अपार्टमेंट के परिसर में पहुंचे, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि, मौत उनके सामने खड़ी है। जैसे ही अभिषेक तिवारी गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकले और अपार्टमेंट की लिफ्ट की तरफ बढ़ने लगे, तभी अंधेरे से निकलकर एक सफेद रंग की तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर सीधे उनकी तरफ दौड़ी।
ड्राइवर की फुर्ती से बची जान
अभिषेक तिवारी ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि, आरोपी पड़ोसी करन कुमार गाड़ी चला रहा था और उसकी नीयत पूरी तरह साफ थी। उसे गाड़ी से वकील को कुचलना था। उस वक्त ड्राइवर गोविंद ने अदम्य साहस और फुर्ती का परिचय दिया। गोविंद ने अपनी गाड़ी को बिजली की तेजी से इस तरह मोड़ा कि फॉर्च्यूनर और अभिषेक के बीच एक ढाल बन गई, वहीं अभिषेक ने भी पलक झपकते ही खुद को दूसरी तरफ उछालकर अपनी जान बचाई।
हमले में विफल होने के बाद आरोपी करन कुमार के तेवर और भी उग्र हो गए। जब ड्राइवर गोविंद ने इस जानलेवा हरकत का विरोध किया, तो आरोपी गाड़ी से नीचे उतरा और चीखते हुए कहा, आज तो तुम्हारा मालिक बच गया, लेकिन यह कब तक बचेगा। यह खुली धमकी इस बात का प्रमाण थी कि, यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी ने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए पुलिस और प्रशासन को अपनी जेब में होने की बात कही। उसने खुद को पूर्व आईएएस अधिकारी विजेंद्र यादव का दामाद और महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अनूप यादव का करीबी रिश्तेदार बताते हुए अभिषेक तिवारी को भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
वकील से रंजिश मानता है आरोपी
अभिषेक तिवारी ने अपनी शिकायत में इस रंजिश की जड़ का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि आरोपी करन कुमार अपार्टमेंट की शांति भंग करने और वहां अनैतिक गतिविधियां संचालित करने का आदी है।
पीड़ित के मुताबिक, करन अक्सर देर रात को बाहरी महिलाओं और असामाजिक तत्वों को अपार्टमेंट में लाता है और तेज संगीत, शराब के साथ पार्टी करता था, जिसका अभिषेक तिवारी विरोध करते हैं। उन्होंने इस मुद्दे को अपार्टमेंट एसोसिएशन में भी उठाया था। आरोपी करण इन्हीं वजहों से उनसे रंजिश मानता है और आज गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की।
महानगर पुलिस ने पीड़ित वकील की तहरीर के आधार पर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस की एक टीम ने अपार्टमेंट का दौरा कर घटना स्थल का मुआयना किया। सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य ‘एल्डिको बसेरा’ के मुख्य द्वार और पार्किंग एरिया में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज है। पुलिस ने इन फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि फॉर्च्यूनर की गति और उसके मुड़ने के कोण की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने राजधानी की पॉश सोसायटियों में सुरक्षा व्यवस्था और पड़ोसी धर्म पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रसूखदार रिश्तेदारों के नाम का सहारा लेकर आम नागरिकों और कानून के रखवालों को धमकाना एक गंभीर प्रवृत्ति बनती जा रही है। वकील समुदाय ने भी इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि, आरोपी की गिरफ्तारी जल्द से जल्द की जाए, चाहे उसके संबंध कितने भी ऊंचे क्यों न हों। दूसरी ओर, अपार्टमेंट के निवासियों ने भी पुलिस को बताया कि वे करन कुमार की गतिविधियों से पहले भी असहज महसूस करते थे, लेकिन डर के कारण कोई सामने नहीं आता था।
फिलहाल, महानगर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। पुलिस उन आईएएस अधिकारियों के संबंधों की भी पुष्टि कर रही है जिनका नाम आरोपी ने धौंस जमाने के लिए इस्तेमाल किया था। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि सीसीटीवी फुटेज में हमले की पुष्टि होती है, तो आरोपी को लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है। यह मामला अब केवल एक सड़क दुर्घटना के प्रयास का नहीं रह गया है, बल्कि यह रसूख बनाम कानून की लड़ाई बन चुका है। लखनऊ की जनता और विशेष रूप से कानूनी बिरादरी की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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