
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और आर्थिक नाकेबंदी के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। ईरान, जो अब तक अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए था, उसने अब अमेरिका के सामने बातचीत की नई मेज सजा दी है। तेहरान ने युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अमेरिका को 14 सूत्रीय एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।
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ईरान ने दिया 14 सूत्रीय प्रस्ताव
इस प्रस्ताव की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, ईरान ने अब 15 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने के विचार पर चर्चा करने की पेशकश की है। यह ईरान के पिछले रुख से बिल्कुल अलग है, जहां वह केवल पांच साल की बात कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर बढ़ती बेरोजगारी और अमेरिकी नाकेबंदी से पस्त हो चुका ईरान अब कूटनीतिक समझौते के जरिए सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है।

ईरान द्वारा दिए गए इस 14-सूत्रीय प्रस्ताव ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। प्रस्ताव के मजमून को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान अब अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी घातक नाकेबंदी हटाने का भारी दबाव बना रहा है। इसके बदले में उसने बाद की किसी तारीख पर परमाणु मुद्दों पर गहन चर्चा करने की संभावना पेश की है।
हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि ईरान ने अपने इस नवीनतम प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी कोई पक्की प्रतिबद्धता या ठोस रियायत देने का वादा नहीं किया है, बल्कि उसने केवल चर्चा के दरवाजे खोले हैं। यह तेहरान की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके जरिए वह पहले अपनी आर्थिक घेराबंदी तोड़ना चाहता है और फिर परमाणु मेज पर अपनी शर्तें रखना चाहता है।
ट्रंप ने जताई निराशा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर शनिवार को अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने कहा कि वह इस 14 सूत्रीय मसौदे का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि, उन्हें फिलहाल पक्का यकीन नहीं है कि वह ईरान के साथ किसी अंतिम समझौते पर पहुंच पाएंगे।
ट्रंप की यह टिप्पणी उनके उस पुराने रुख को दर्शाती है जिसमें वह ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति अपनाते रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने यह बयान तब दिया जब महज एक दिन पहले ही उन्होंने मध्यस्थ देश पाकिस्तान के जरिए मिले पिछले प्रस्तावों पर गहरी निराशा व्यक्त की थी। अमेरिका की मुख्य मांग यह रही है कि ईरान न केवल संवर्धन रोके बल्कि अपने यूरेनियम भंडार को हमेशा के लिए खत्म कर दे।
प्रस्ताव के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने 15 साल तक यूरेनियम संवर्धन को रोकने के विचार पर चर्चा करने की बात कही है। यह समय सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2015 के संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के बाद यह पहली बार है जब ईरान इतनी लंबी अवधि के लिए पीछे हटने का संकेत दे रहा है। ईरानी प्रस्ताव में यह भी उल्लेख है कि, यदि एक बार संवर्धन पर लगी यह रुकावट खत्म होती है, तो ईरान भविष्य में केवल 3.6 प्रतिशत तक ही संवर्धन करेगा।
नष्ट नहीं करेगा परमाणु सुविधा प्लांट
गौरतलब है कि, 2015 के समझौते के तहत ईरान को 3.67 प्रतिशत तक संवर्धन की छूट मिली थी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह चाहते हैं कि, ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को जड़ से मिटा दे और संवर्धन को हमेशा के लिए बंद करे। प्रस्ताव का एक और संवेदनशील हिस्सा अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार से जुड़ा है।
ईरान ने संकेत दिया है कि, वह इस भंडार के भविष्य पर बातचीत करने को तैयार है। उसने विकल्पों के तौर पर इस भंडार को किसी तीसरे देश भेजने या इसे पतला करने की संभावना जताई है। यह अमेरिका के लिए एक बड़ी जीत हो सकती है क्योंकि वॉशिंगटन लगातार यह मांग कर रहा है कि ईरान अपना पूरा HEU भंडार उसके सुपुर्द कर दे, लेकिन ईरान ने यहां भी एक पेंच फंसाया है, उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपनी किसी भी परमाणु सुविधा या प्लांट को नष्ट नहीं करेगा। यानी ईरान अपनी तकनीक और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना चाहता है ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर वह इसे फिर से शुरू कर सके।
यूएस ने तोड़ी ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर
ईरान के इस बदले हुए रुख के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी आंतरिक बदहाली है। अमेरिकी नाकेबंदी ने ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध की स्थिति और प्रतिबंधों के कारण ईरान में 20 लाख से ज्यादा लोग अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं और बेरोजगार हो गए हैं। तेहरान की सत्ता को यह डर सता रहा है कि अगर बेरोजगारी और महंगाई का यह विस्फोट जल्द नहीं थमा, तो लोग सड़कों पर उतर आएंगे और देश में आंतरिक विद्रोह जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने हालांकि यह दावा किया है कि, यह 14-सूत्रीय प्रस्ताव केवल युद्ध खत्म करने पर केंद्रित है, लेकिन प्रस्ताव की बारीकियां बताती हैं कि परमाणु मुद्दे को चर्चा में शामिल करना ईरान की मजबूरी बन चुका है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि अमेरिका और ईरान अगले महीने तक होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और युद्ध की समाप्ति को लेकर किसी ठोस नतीजे पर पहुंचते हैं, तो ईरान एक महीने तक सघन परमाणु वार्ता करने के लिए राजी हो जाएगा।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने भी अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की है कि ईरान अब प्रतिबंधों में ढील के बदले परमाणु मुद्दों पर सौदेबाजी करने का मन बना चुका है। अब गेंद पूरी तरह से अमेरिका के पाले में है। क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान के इस 15 साल वाले फॉर्मूले को स्वीकार करेंगे या फिर वे हमेशा के लिए पाबंदी वाली अपनी मांग पर अड़े रहेंगे, यह आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन इतना साफ है कि ईरान ने अपनी नाकेबंदी खुलवाने के लिए परमाणु कार्ड को मेज पर फेंक दिया है।
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