
लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के तमाम हिस्सों में सोमवार सुबह आए भीषण आंधी-तूफान और बेमौसम बरसात ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। प्रकृति के इस बदलते मिजाज और इससे उत्पन्न हुई चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लहजे में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रतिकूल मौसम की इस घड़ी में सीधे जनता के बीच जाएं और राहत कार्यों की कमान संभालें। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि, आपदा की इस घड़ी में किसानों और आम नागरिकों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसे भी पढ़ें- लखनऊ की जर्जर इमारतों को जमींदोज करेगा LDA, तैयार हो चुका है पूरा खाका
मुआवजे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार की सुबह मौसम के बिगड़े तेवरों को देखते हुए एक उच्चस्तरीय समीक्षा की और प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि पूरी सरकारी मशीनरी को इस समय सक्रिय रहने की आवश्यकता है ताकि खराब मौसम का आमजन पर पड़ने वाला प्रभाव न्यूनतम किया जा सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जनहानि, पशुहानि और फसल के नुकसान पर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने जिलाधिकारियों को यह कड़ा आदेश दिया है कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है या जिनके पशुधन का नुकसान हुआ है, उन्हें आगामी 24 घंटों के भीतर मुआवजा राशि उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या कागजी देरी को अक्षम्य माना जाएगा।
बेहतर इलाज के निर्देश
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों से आंधी और बारिश के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की खबरें भी सामने आई हैं। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जहां भी दुर्घटनाएं हुई हैं, वहां राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जाएं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को तालमेल बिठाने को कहा है ताकि घायलों को बिना किसी देरी के निकटतम अस्पतालों में भर्ती कराया जा सके और उन्हें बेहतर से बेहतर इलाज मिल सके। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि मानवीय क्षति को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाता के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें और खलिहानों में रखा अनाज इस मौसम की मार झेल रहा है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर प्रतिकूल परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।
उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फसलों के नुकसान का त्वरित आकलन करें ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत पहुंचाई जा सके। सरकार का प्रयास है कि कुदरत की इस मार का असर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों के मनोबल पर न पड़े।
फील्ड में रहें अधिकारी
प्रशासनिक सक्रियता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में रहने का कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि केवल रिपोर्ट मंगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिलाधिकारियों और अन्य फील्ड अधिकारियों को खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करना होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब अधिकारी जमीन पर उतरकर लोगों से सीधा संवाद करते हैं, तो न केवल राहत कार्यों में तेजी आती है, बल्कि जनता के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास भी बढ़ता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वस्तुस्थिति का जायजा लें और स्थानीय लोगों की जरूरतों को समझते हुए समन्वय स्थापित करें।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है कि, किसी भी विपरीत स्थिति या आपातकालीन आवश्यकता की सूचना तत्काल शासन को उपलब्ध कराई जाए। सूचना तंत्र को इतना सुदृढ़ बनाने को कहा गया है कि पल-पल की जानकारी लखनऊ स्थित मुख्यालय तक पहुंचती रहे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन या सहायता बिना किसी देरी के भेजी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन का मुख्य आधार समयबद्धता और संवेदनशीलता है, और इन दोनों ही मोर्चों पर प्रशासन को अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी।
विद्युत् आपूर्ति बहाल करने के निर्देश
राजधानी लखनऊ की बात करें तो सोमवार सुबह अचानक छाए घने काले बादलों और धूल भरी आंधी ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई जगहों पर पेड़ गिरने और बिजली के खंभे उखड़ने की खबरें आईं, जिससे बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को भी निर्देशित किया है कि जहां भी बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल की जाए। उन्होंने नगर निकायों को जलभराव और गिरे हुए पेड़ों को सड़कों से हटाने के लिए विशेष टीमों को तैनात करने का आदेश दिया है ताकि यातायात बाधित न हो और लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि, वे जनता की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने साफ किया कि, सरकार का खजाना आपदा पीड़ितों के लिए खुला है, लेकिन इसके वितरण में पारदर्शिता और गति होना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने अपने निर्देशों के अंत में यह भी दोहराया कि, उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता पाई गई या जनता की शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आपात स्थिति के लिए तैयार रहें अधिकारी
फिलहाल, मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम के इसी तरह बने रहने की चेतावनी जारी की है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जनपदों के नियंत्रण कक्षों (कंट्रोल रूम) को 24 घंटे क्रियाशील रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। सरकार की प्राथमिकता अब यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पीड़ित सहायता से वंचित न रहे और जल्द से जल्द जनजीवन सामान्य हो सके।
इसे भी पढ़ें- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट, 15 मई तक टला लोकार्पण, ये है असली वजह



