यूपी BJP में मिशन 2027 का ब्लूप्रिंट तैयार, संगठन में जल्द होगी नए चेहरों की एंट्री, कैबिनेट विस्तार की भी हलचल तेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय भीषण गर्मी के साथ-साथ सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लखनऊ से लेकर दिल्ली के गलियारों तक केवल एक ही चर्चा है ‘बदलाव’। उत्तर प्रदेश भाजपा में बड़े स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल और योगी मंत्रिमंडल में विस्तार की सुगबुगाहट ने राज्य की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है।

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स्पेशल प्लान तैयार

पिछले कुछ दिनों से पार्टी के दिग्गज नेताओं की दिल्ली दौड़ और वहां शीर्ष नेतृत्व के साथ हो रही मैराथन बैठकों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि अब किसी भी क्षण बड़े फैसले की घोषणा हो सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह महज एक सामान्य फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का एक ठोस ब्लूप्रिंट है, जिसके जरिए भाजपा जातिगत समीकरणों को साधने और असंतुष्टों को मनाने की कोशिश में जुटी है।

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उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र इस समय दिल्ली का दीनदयाल उपाध्याय मार्ग और रायसीना हिल्स बना हुआ है। पिछले 48 घंटों के भीतर जिस तरह से प्रदेश के दिग्गज नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाला है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा आलाकमान ने यूपी के लिए कोई स्पेशल प्लान तैयार कर लिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिग्गज नेताओं से लंबी मंत्रणा की है।

केशव प्रसाद मौर्य का दिल्ली दौरा हमेशा से ही सियासी मायनों में बेहद अहम माना जाता रहा है और इस बार की उनकी सक्रियता संगठन में उनके बढ़ते कद या सरकार में उनकी नई भूमिका की ओर इशारा कर रही है। दूसरी तरफ, दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी दिल्ली में राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े के साथ गोपनीय बैठक की है। इन मुलाकातों का सिलसिला यहीं नहीं थमा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की दिल्ली रवानगी ने चर्चाओं को और बल दे दिया है। इन तमाम मुलाकातों के पीछे का असल मकसद प्रदेश कार्यकारिणी की अंतिम सूची और मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए नामों पर मुहर लगवाना बताया जा रहा है।

पुराने चेहरों की छुट्टी तय!

संगठनात्मक ढांचे की बात करें तो भाजपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की प्रक्रिया लंबे समय तक चली, जिसके बाद दिसंबर में पंकज चौधरी को प्रदेश की कमान सौंपी गई थी। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे अपनी नई टीम का गठन कब करेंगे। हालांकि, जिला स्तर पर कार्यकारिणी का ऐलान हो चुका है, लेकिन प्रदेश स्तर की टीम अभी भी अधर में लटकी हुई है।

सूत्रों का कहना है कि, पंकज चौधरी फिलहाल उजबेकिस्तान में एशियन डेवलपमेंट बैंक की बैठक में व्यस्त हैं, लेकिन उनके लौटते ही प्रदेश कार्यकारिणी की सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी। इस बार की कार्यकारिणी में पुराने चेहरों की छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है।

पार्टी आलाकमान चाहता है कि संगठन में ऐसे चेहरों को जगह दी जाए जो न केवल जमीन पर काम कर सकें, बल्कि विपक्षी दलों के सोशल इंजीनियरिंग के काट के तौर पर भी फिट बैठें। नए चेहरों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि पार्टी का आधार और मजबूत हो सके।

सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में भी बड़ी सर्जरी की तैयारी चल रही है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लखनऊ के कालिदास मार्ग से लेकर दिल्ली तक कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इस विस्तार में कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है या जो संगठन के कामकाज में ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं। वहीं, कुछ नए और ऊर्जावान विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।

हो सकता है बड़ा उलटफेर

खासकर उन क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है, जो पिछले कुछ समय से पार्टी से छिटकते नजर आए हैं। मंत्रिमंडल में फेरबदल के जरिए सरकार जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि वह विकास और अनुशासन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। विभागों के बंटवारे में भी इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है, जिससे शासन की गति में तेजी लाई जा सके।

लखनऊ और दिल्ली के बीच चली इन बैठकों में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर सामने आया है, वह है मिशन 2027। भाजपा नेतृत्व जानता है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी ही केंद्र का रास्ता तय करती है। ऐसे में किसी भी तरह की ढिलाई पार्टी को भारी पड़ सकती है। प्रदेश कार्यकारिणी को अंतिम रूप देने के लिए खुद केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के संकेतों का भी ध्यान रखा गया है।

सूत्रों का दावा है कि इस हफ्ते के अंत तक या अगले हफ्ते की शुरुआत में औपचारिक घोषणाओं की झड़ी लग सकती है। इस फेरबदल में पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक के सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। पश्चिम में रालोद के साथ गठबंधन के बाद जो नई स्थितियां बनी हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है, तो वहीं पूर्वांचल में पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों को गोलबंद करने के लिए नए नेतृत्व को सामने लाने की योजना है।

पंकज चौधरी का इंतजार

फिलहाल, पूरी पार्टी को पंकज चौधरी के स्वदेश लौटने का इंतजार है। उनके लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ एक अंतिम बैठक होगी, जिसके बाद राजभवन में हलचल बढ़ सकती है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बार कुछ ऐसे नामों को भी मौका मिल सकता है, जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है। भाजपा के इस कदम से न केवल पार्टी के भीतर का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि विपक्षी दलों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा।

दिल्ली की इन अहम बैठकों ने यह तो तय कर दिया है कि यूपी भाजपा अब एक नए कलेवर और नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि ये बदलाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि भाजपा की भविष्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला होगा। सत्ता और संगठन के इस समन्वय से निकलने वाला परिणाम ही यह तय करेगा कि भाजपा आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए कितनी तैयार है।

 

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