
ग्रेटर नोएडा। भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है क्योंकि ग्रेटर नोएडा के जेवर में निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी आधुनिक तकनीकों और विशाल बुनियादी ढांचे के साथ संचालन के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के साझा प्रयासों से बन रहा यह प्रोजेक्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं है बल्कि यह आधुनिक भारत की बदलती तस्वीर और तकनीकी श्रेष्ठता का एक जीवंत प्रमाण है।
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घने कोहरे में भी लैंड होंगे विमान
इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका तकनीकी रूप से इतना सक्षम होना है कि यह दुनिया के सबसे उन्नत हवाई अड्डों की श्रेणी में गिना जाएगा। यहां इस्तेमाल की जा रही अत्याधुनिक कैट-3 (CAT-3) तकनीक ने विशेषज्ञों और भविष्य के यात्रियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। यह तकनीक विशेष रूप से उत्तर भारत की उन भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर चुनी गई है, जहां सर्दियों के मौसम में घना कोहरा विमानन सेवाओं के लिए एक बड़ी बाधा बनता रहा है।

कैट-3 तकनीक की मदद से अब घने कोहरे और बेहद खराब दृश्यता के बावजूद विमान बिना किसी व्यवधान के सुरक्षित रूप से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकेंगे। अक्सर देखा जाता है कि दिल्ली-एनसीआर के हवाई अड्डों पर सर्दियों के दौरान दृश्यता कम होने से सैकड़ों उड़ानें रद्द हो जाती हैं या उन्हें दूसरे शहरों में डायवर्ट करना पड़ता है, जिससे न केवल एयरलाइंस को भारी वित्तीय नुकसान होता है बल्कि यात्रियों को भी भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
रद्द नहीं होंगी उड़ानें
जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित किया जा रहा यह ऑटोमैटिक गाइडेंस सिस्टम पायलटों को शून्य दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी रनवे के सटीक केंद्र को पहचानने और विमान को सुरक्षित उतारने में सहायता प्रदान करेगा। इससे न केवल उड़ानों के समयबद्ध संचालन में मदद मिलेगी बल्कि यह यात्रियों को उड़ानों के रद्द होने की अनिश्चितता से भी पूरी तरह राहत दिलाएगा।
इंजीनियरिंग की दृष्टि से देखें तो इस एयरपोर्ट का रनवे अपने आप में एक मिसाल है। करीब 3900 मीटर लंबा यह रनवे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुनिया के सबसे बड़े और भारी वाणिज्यिक विमानों को भी आसानी से संभाल सकता है। रनवे की लंबाई और इसकी उच्च गति परिचालन क्षमता इसे भारत के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों की कतार में खड़ा करती है।
शुरुआत में भले ही यहां एक रनवे के साथ उड़ानों का सिलसिला शुरू किया जाएगा, लेकिन भविष्य की बढ़ती जरूरतों और बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही दूसरे रनवे और विस्तार की योजनाएं तैयार कर ली हैं। इस रनवे का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले मानकों के साथ किया गया है ताकि विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ की प्रक्रिया बेहद सुचारु रहे और यात्रियों को किसी भी तरह के झटके या असुविधा का अनुभव न हो।
बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए आसान होगी यात्रा
एयरपोर्ट के भीतर यात्रियों के अनुभव को सुगम बनाने के लिए बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां कुल 10 विशाल एयरोब्रिज बनाए जा रहे हैं जो टर्मिनल बिल्डिंग को सीधे विमानों से जोड़ेंगे। इन एयरोब्रिज की सुविधा से यात्रियों को विमान तक पहुंचने के लिए बसों या लंबी पैदल दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे बोर्डिंग और उतरने की प्रक्रिया की गति में भारी इजाफा होगा। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी बल्कि बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए भी यात्रा को सुगम बनाएगी।

एयरपोर्ट की क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, यहां के आधुनिक डिजाइन के कारण एक घंटे में लगभग 30 विमानों की आवाजाही संभव हो सकेगी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की यह दक्षता सुनिश्चित करेगी कि आसमान में विमानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और हवाई क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा न हो।
4 लेयर की है सुरक्षा
सुरक्षा के मोर्चे पर भी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक अभेद्य किले की तरह तैयार किया गया है। पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की कमान बेहद सख्त हाथों में सौंपी गई है। हाल के घटनाक्रमों के अनुसार स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ने परिसर को अपनी सुरक्षा परिधि में ले लिया है और हर प्रवेश द्वार पर अत्याधुनिक निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चार अलग-अलग स्तरों में विभाजित किया गया है जिसमें एसपीजी के कमांडो के साथ-साथ अर्धसैनिक बल, पीएसी और खुफिया इकाइयों का एक मजबूत तंत्र शामिल है।
श्रीराम नवमी के पावन अवसर पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून-पिथौरागढ़-देहरादून विमान सेवा (42 सीटर) का शुभारंभ किया। इस हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और पर्यटन के साथ रोजगार के अन्य अवसरों को भी विस्तार मिलेगा।
इस दौरान माननीय… pic.twitter.com/dUoSXt7Lao
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) March 26, 2026
मेरठ और आगरा जोन से अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि, एयरपोर्ट का हर कोना पूरी तरह सुरक्षित रहे। यहां बिना अनुमति के प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है और केवल अधिकृत पास धारकों को ही गहन जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है।
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
नोडल अधिकारी शैलेन्द्र भाटिया ने इस संबंध में पुष्टि की है कि एयरपोर्ट को आधुनिकतम वैश्विक सुविधाओं से लैस करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि एयरपोर्ट का डिजाइन और यहां की तकनीकी क्षमताएं हर तरह के मौसम में विमानों के निर्बाध संचालन की गारंटी देंगी।
उनका कहना है कि जेवर एयरपोर्ट केवल उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक गौरव का विषय होगा क्योंकि यह वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के साथ-साथ भारत की आर्थिक प्रगति को एक नई गति प्रदान करेगा। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा करेगा जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का आर्थिक नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।
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