
आज के दौर की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हृदय रोग यानी हार्ट अटैक एक ऐसी महामारी का रूप ले चुका है, जिसने उम्र की सीमाओं को पूरी तरह से तोड़ दिया है। वह दौर बीत चुका है जब दिल की बीमारियां केवल साठ साल की उम्र के बाद की चिंता मानी जाती थीं, आज पच्चीस से चालीस साल के युवा भी इस जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
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नुकसान पहुंचाती है रोज की ये आदत
खानपान में गड़बड़ी, अत्यधिक मानसिक तनाव, नींद की भारी कमी और शारीरिक निष्क्रियता को तो हम मुख्य कारण मानते ही हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों ने अब एक ऐसी रोजमर्रा की आदत की ओर इशारा किया है जिसे हम अक्सर अपनी फुर्ती और अनुशासन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

यह आदत है सुबह सोकर उठते ही झटके से बिस्तर छोड़ देना और तुरंत अपने भारी कामों या व्यायाम में जुट जाना। दिखने में यह एक सामान्य प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन शरीर के आंतरिक तंत्र के लिए यह एक मैकेनिकल शॉक की तरह काम करती है जो सीधे हृदय की धमनियों पर जानलेवा दबाव डालता है।
दरअसल, सुबह का समय मानव शरीर के लिए एक संधिकाल की तरह होता है, जहां शरीर गहरी नींद की सुप्तावस्था से सक्रिय अवस्था की ओर बढ़ रहा होता है। जब हम सो रहे होते हैं, तो हमारा रक्तचाप अपने सबसे निचले स्तर पर होता है और हृदय गति भी काफी धीमी होती है क्योंकि शरीर को उस समय ऊर्जा की न्यूनतम आवश्यकता होती है। जैसे ही हमारी आंख खुलती है, शरीर का सर्कैडियन रिदम यानी आंतरिक जैविक घड़ी सक्रिय हो जाती है और शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्राव होने लगता है ताकि हम जाग सकें।
धमनियों पर पड़ता है दबाव
यदि इस नाजुक मोड़ पर कोई व्यक्ति अलार्म बजते ही झटके से उठकर खड़ा हो जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर का रक्त अचानक नीचे पैरों की ओर भागता है। इस स्थिति को संभालने के लिए हृदय को अचानक बहुत तीव्र गति से धड़कना पड़ता है ताकि मस्तिष्क और ऊपरी अंगों तक रक्त पहुंचाया जा सके। रक्तचाप में आने वाला यह अचानक और तीव्र उछाल कमजोर दिल वालों या पहले से ही उच्च रक्तचाप से जूझ रहे लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है क्योंकि यह धमनियों की दीवारों पर असहनीय दबाव बनाता है।
सुबह के समय हृदय पर पड़ने वाले इस तनाव के पीछे एक और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण रक्त की संरचना और हाइड्रेशन का स्तर है। रात भर सात-आठ घंटे की नींद के दौरान हम पानी का सेवन नहीं करते, जिससे सुबह के समय शरीर हल्के डिहाइड्रेशन की स्थिति में होता है। पानी की कमी के कारण सुबह हमारा रक्त तुलनात्मक रूप से अधिक गाढ़ा और चिपचिपा होता है।
शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करें
गाढ़े रक्त को पंप करने के लिए दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में यदि व्यक्ति बिस्तर से उठते ही दौड़ना शुरू कर दे या जिम में भारी वजन उठाने लगे, तो दिल की मांसपेशियों पर अचानक इतना अधिक बोझ बढ़ जाता है कि वे इसे सहन नहीं कर पातीं। यही कारण है कि, दुनिया भर में कार्डियोलॉजिस्ट्स का यह मानना है कि, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के सबसे ज्यादा मामले सुबह चार बजे से दस बजे के बीच ही सामने आते हैं। इस समय को वल्नरेबल पीरियड यानी संवेदनशील समय कहा जाता है क्योंकि इस दौरान शरीर का सुरक्षा तंत्र धीरे-धीरे सक्रिय हो रहा होता है।
इस गंभीर खतरे से बचने के लिए विशेषज्ञों ने धीमी शुरुआत के महत्व पर जोर दिया है। उनका कहना है कि, जैसे ही आपकी नींद खुले, तुरंत बिस्तर छोड़ने के बजाय कम से कम दो से तीन मिनट तक लेटे रहकर अपने शरीर को जागने का संकेत देना चाहिए। इस दौरान हाथ-पैर की उंगलियों को हिलाना और गहरी सांसें लेना फेफड़ों और हृदय को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इसके बाद करवट लेकर धीरे से बैठना चाहिए और करीब तीस सेकंड तक बिस्तर के किनारे पैर लटकाकर बैठने से रक्तचाप को गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठाने का समय मिल जाता है। यह छोटी सी सावधानी रक्त वाहिकाओं को अचानक फटने या ब्लॉक होने से बचा सकती है।
एक घंटे लगता है रक्त प्रवाह सामान्य होने में
आजकल के युवाओं में सुबह उठते ही बिना वार्म-अप के हाई इंटेंसिटी वर्कआउट करने का जो जुनून है, वह भी इस जोखिम को कई गुना बढ़ा रहा है। शरीर को पूरी तरह सक्रिय होने और रक्त के प्रवाह को सामान्य करने के लिए कम से कम एक घंटे का समय देना अनिवार्य है, जिसके बाद ही कोई कठिन शारीरिक श्रम किया जाना चाहिए।

हमें यह समझना होगा कि, दिल की सेहत केवल जिम जाने या सप्लीमेंट्स लेने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि यह हमारी सूक्ष्म आदतों पर निर्भर करती है। सुबह उठते ही फोन की स्क्रीन देखना या ईमेल चेक करना भी मानसिक तनाव को तुरंत बढ़ाकर दिल पर दबाव डालता है। हृदय रोग विशेषज्ञों की यह स्पष्ट चेतावनी है कि जो लोग डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल या मोटापे जैसी समस्याओं से घिरे हैं, उनके लिए सुबह की यह हड़बड़ी मौत का जाल साबित हो सकती है।
शरीर एक मशीन की तरह है जिसे स्टार्ट होने के बाद धीरे-धीरे अपनी गति पकड़नी चाहिए, न कि पहले ही सेकंड में टॉप गियर में डाल देना चाहिए। यदि हम अपनी सुबह की इस एक आदत को सुधार लें और धैर्य के साथ दिन की शुरुआत करें, तो हम अपने दिल को एक लंबी और सुरक्षित आयु प्रदान कर सकते हैं। सजगता और संयम ही वह सबसे बड़ा हथियार है जो हमें इस आधुनिक युग के ‘साइलेंट किलर’ से बचा सकता है।
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