प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने नीम करौरी आश्रम में लगाया ध्यान, वात्सल्य ग्राम में बच्चों पर लुटाया प्यार

मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने न सिर्फ अयोध्या के राम मन्दिर में ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना कर राष्ट्र के गौरव को अक्षुण्ण बनाया, बल्कि मथुरा-वृंदावन की आध्यात्मिक नगरी में पहुंचकर भक्ति और सेवा का अनुपम संगम भी प्रस्तुत किया। ब्रज की पावन भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन किसी तीर्थाटन से कम नहीं था, जहां उन्होंने संतों के सानिध्य, आश्रमों की शांति और वात्सल्य की सेवा को अपने अनुभव में संजोया।

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 संध्या आरती में लिया भाग

आपको बता दें कि, राष्ट्रपति की यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु 19 मार्च को अयोध्या रहा। वहां उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर की दूसरी मंजिल पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना की। इस यंत्र की स्थापना मंदिर निर्माण के अंतिम सोपान के रूप में देखी जा रही है, जिसके साथ ही भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य पूर्णता के चरण में पहुंच गया है। अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन और पूजन के उपरांत राष्ट्रपति गुरुवार की शाम मथुरा पहुंचीं, जहां उन्होंने इस्कॉन मंदिर में संध्या आरती में भाग लिया और ब्रज की भक्तिमय संस्कृति का अनुभव किया।

शुक्रवार का दिन राष्ट्रपति के लिए पूरी तरह से आध्यात्मिक और दार्शनिक रहा। वृंदावन पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले श्री हित राधा केली कुंज आश्रम का रुख किया। यहां राष्ट्रपति का स्वागत अत्यंत भव्य और पारंपरिक तरीके से किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से शिष्टाचार भेंट की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हुई यह मुलाकात पूरी तरह से सात्विक रही।

संत प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद

राष्ट्रपति और महाराज के बीच मुख्य रूप से अध्यात्म, समाज सेवा और जनकल्याण के विषयों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति ने कहा कि, समाज में संतों का मार्गदर्शन नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लिया और उनके विचारों को आत्मसात किया। आश्रम के अनुयायियों के लिए यह क्षण अत्यंत गौरवशाली रहा।

President Draupadi Murmu

प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाद राष्ट्रपति नीब करौरी बाबा के आश्रम पहुंचीं। यहां उन्होंने बाबा की कुटिया में बैठकर कुछ समय ध्यान लगाया और उनकी समाधि स्थल पर नतमस्तक होकर प्रार्थना की।  यहां की शांति और सादगी से प्रभावित राष्ट्रपति ने बाबा के उपदेशों के संग्रहालय का भी अवलोकन किया।

नीब करौरी बाबा के आश्रम भी गईं

इस अवसर पर आध्यात्मिक गुरु अनुराग कृष्ण पाठक ने राष्ट्रपति को नीब करौरी बाबा से जुड़ी स्मृतियों से अवगत कराया। राष्ट्रपति ने इस दिव्य भूमि पर आने को अपना सौभाग्य बताया। इस दौरान उन्हें बाबा का ‘प्रसादी कंबल’ भेंट किया गया, जिसे उन्होंने श्रद्धापूर्वक अपने माथे से लगाया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, इस दिव्य भूमि के दिव्य मंदिरों में आकर मैं स्वयं को धन्य महसूस कर रही हूं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित वात्सल्य ग्राम भी रहा। यह संस्था अनाथ बच्चों और निराश्रित बुजुर्गों के लिए एक मसीहा के रूप में कार्य करती है। यहां राष्ट्रपति ने संस्थान के कामकाज का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां रहने वाले बच्चों व वृद्धों के साथ आत्मीयता से संवाद किया।

President Draupadi Murmu

प्रोटोकॉल की मर्यादाओं से इतर राष्ट्रपति ने वहां के गोकुलम में बच्चों के कार्यक्रमों का आनंद लिया। उन्होंने बच्चों के साथ न केवल समय बिताया, बल्कि उनके साथ फोटो भी खिंचवाए। बच्चों के प्रति उनकी यह स्नेहिल छवि देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। राष्ट्रपति ने वात्सल्य ग्राम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

आज करेंगी सात मील की गोवर्धन परिक्रमा

राष्ट्रपति की इस तीन दिवसीय यात्रा का समापन 21 मार्च को गोवर्धन क्षेत्र में होगा। यहां वे दंगहाटी मंदिर में प्रार्थना करेंगी और सात मील की पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा करेंगी। यह परिक्रमा ब्रज संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिसे पूरा करने के बाद राष्ट्रपति नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उत्तर प्रदेश यात्रा मात्र एक सरकारी दौरा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के गौरव और प्राचीन भारतीय परंपराओं के सामंजस्य का प्रतीक है। अयोध्या में राम यंत्र की स्थापना कर उन्होंने जहां राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बल दिया, वहीं मथुरा में संतों और बच्चों के बीच समय बिताकर उन्होंने एक सरल और संवेदनशील व्यक्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी इस यात्रा से ब्रजवासियों में हर्ष की लहर है और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ उनके सहज स्वभाव की भी चहुंओर चर्चा हो रही है।

 

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