
ग्रेटर नोएडा। यमुना अथॉरिटी ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट इलाके में गैर-कानूनी कब्ज़ों पर बुलडोज़र चला दिया। अथॉरिटी की टीम ने करीब 74,000 स्क्वायर मीटर ज़मीन को आज़ाद कराया, जिसकी कीमत करीब ₹350 करोड़ बताई जा रही है। इस कार्रवाई से इलाके में हलचल मच गई और गैर-कानूनी कब्ज़ा करने वालों में दहशत फैल गई।
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निवेशक हुए सतर्क
जानकारी के अनुसार, एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार उत्तर प्रदेश के ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के पास जमीन कब्जाने वाले भू-माफियाओं पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर एयरपोर्ट के नजदीक दयांतपुर क्षेत्र में गरजते हुए बुलडोजरों के साथ करीब 350 करोड़ रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हुई इस कार्रवाई ने न केवल अवैध कब्जा करने वालों की कमर तोड़ दी है, बल्कि उन निवेशकों को भी सतर्क कर दिया है जो सस्ते प्लॉट के चक्कर में भू-माफियाओं के जाल में फंस जाते हैं और अपनों जमा पूंजी गंवा देते हैं। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि, जेवर एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में बाधा डालने वाले किसी भी अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
लंबे समय से मिल रही थी कब्जे की शिकायत
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में विकास की नई इबारत लिख रहे जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ यमुना प्राधिकरण ने अपनी मंशा साफ कर दी है। प्राधिकरण की टीम ने एक सुनियोजित अभियान के तहत करीब 74,000 वर्ग मीटर जमीन पर चले अवैध कब्जों को जमींदोज कर दिया। इस जमीन की वर्तमान बाजार दर के अनुसार अनुमानित कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
यह पूरी कार्रवाई यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह के कड़े निर्देश के बाद की गई। बताया जा रहा है कि, प्राधिकरण को लगातार सूचना मिल रही थी कि, एयरपोर्ट के पास स्थित दयांतपुर और आसपास के गांवों में प्राधिकरण की अधिग्रहित जमीन पर कुछ रसूखदार लोग और भू-माफिया अवैध तरीके से बाउंड्री वाल और पक्के मकान बना रहे हैं। इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण ने जांच की और बुलडोजर की कार्रवाई की।
मलबे में तब्दील हुए अवैध निर्माण
अभियान को सफल बनाने के लिए एसीईओ राजेश कुमार और विशेष कार्य अधिकारी शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष कार्यदल का गठन किया गया। विरोध की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों को साथ लिया गया। सुबह जैसे ही प्राधिकरण का दस्ता दयांतपुर पहुंचा, अवैध कब्जाधारियों में खलबली मच गई। टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी की और देखते ही देखते कई अवैध कॉलोनियों के ढांचे और बाउंड्री वॉल को मलबे में तब्दील कर दिया।
यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट का काम जैसे-जैसे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आसपास की जमीनों की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्व और स्थानीय भू-माफिया प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित और अधिग्रहित जमीन पर रातों-रात निर्माण कार्य करा लेते हैं। दयांतपुर गांव के पास की जिस जमीन पर कार्रवाई हुई, वहां कब्जाधारियों ने न सिर्फ बाउंड्री वॉल बना ली थी, बल्कि कई स्थानों पर पक्के कमरे और ऑफिस तक खड़े कर दिए थे ताकि जमीन पर अपना हक जताया जा सके।
लोगों ने किया विरोध का प्रयास
प्राधिकरण की टीम ने कई घंटों तक चले इस अभियान में आधुनिक मशीनों और बुलडोजरों की मदद से 74,000 वर्ग मीटर के पूरे पैच को पूरी तरह साफ कर दिया। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उनकी एक न चली। यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस कार्रवाई के बाद एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि जेवर एयरपोर्ट की चमक देखकर लोग यहां निवेश करने के लिए उतावले हैं। इसी का फायदा उठाकर भू-माफिया भोले-भाले लोगों को प्राधिकरण की जमीन पर सस्ते प्लॉट का लालच देकर ठगते हैं। वे अवैध रूप से नक्शे पास होने का दावा करते हैं और लोगों की मेहनत की गाढ़ी कमाई हड़प लेते हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि, सेक्टर 18, 20 और एयरपोर्ट के आसपास का पूरा क्षेत्र मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जा रहा है। यहां बिना प्राधिकरण की अनुमति के कोई भी खरीद-फरोख्त या निर्माण पूरी तरह अवैध है। ऐसी जमीनों पर खरीदे गए प्लॉट का न तो कभी बैनामा होगा और न ही प्राधिकरण वहां बिजली-पानी जैसी सुविधाएं प्रदान करेगा।
इन गांवों में भी चलेगा अभियान
यमुना प्राधिकरण की इस कार्रवाई ने क्षेत्र में सक्रिय अवैध कॉलोनाइजरों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने साफ किया है कि, यह केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में जेवर, रबूपुरा और यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित अन्य गांवों में भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे।

प्राधिकरण ने अब उन लोगों की सूची भी तैयार करना शुरू कर दिया है जो बार-बार कब्जा हटाने के बावजूद फिर से अतिक्रमण कर लेते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ न केवल बुलडोजर चलेगा, बल्कि उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली का भी प्रावधान किया जा रहा है।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में आएगी बाधा
जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए यमुना प्राधिकरण तेजी से काम कर रहा है। यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक पार्क, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के लिए जमीन का हर टुकड़ा कीमती है। यदि समय रहते इन अवैध कब्जों को नहीं हटाया गया, तो भविष्य में विकास कार्यों के लिए सड़क चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बाधा आ सकती है।
प्राधिकरण का लक्ष्य है कि जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से पहले पूरे क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से सजाया जाए, जहां किसी भी तरह का अनधिकृत निर्माण न हो। इस अभियान के जरिए शासन और प्रशासन ने यह कड़ा संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन पर कब्जा करने का दौर अब खत्म हो चुका है।
यमुना प्राधिकरण की इस 350 करोड़ रुपये की जमीन की रिकवरी से विकास योजनाओं को नई गति मिलेगी। आम जनता को भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी जमीन को खरीदने से पहले यमुना प्राधिकरण के कार्यालय या वेबसाइट पर जाकर उसकी वैधता की जांच अवश्य करें।
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