
नई दिल्ली। संसद में पिछले कई दिनों से चल रहा गतिरोध आखिरकार मंगलवार को समाप्त हो गया। बजट सत्र के दौरान अमर्यादित आचरण और हंगामे के चलते निलंबित किए गए विपक्ष के 8 सांसदों का कुछ शर्तों के साथ निलंबन वापस हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल और सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति के बाद आज 17 मार्च को सदन में प्रस्ताव लाकर इन सांसदों का निलंबन रद्द किया गया।
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हालांकि, इस निलंबन वापसी के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक अघोषित समझौते की बात भी सामने आ रही है। बीजेपी का दावा है कि, विपक्ष ने सदन की गरिमा बनाए रखने और भविष्य में उत्पात न मचाने का लिखित या मौखिक आश्वासन दिया है, जिसके बाद ही यह निलंबन वापस हुआ है।
स्पीकर ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
बताया जा रहा है कि, इस निलंबन वापसी की प्रक्रिया सोमवार को उस समय शुरू हुई, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई और इन मुद्दों पर चर्चा की। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद इस बात पर सहमति बनी कि, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की उपस्थिति अनिवार्य है और सदन के सुचारु संचालन के लिए निलंबन समाप्त किया जाना चाहिए। बैठक में सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि, सांसदों को सदन की मर्यादा और अनुशासन का पालन करना होगा।

निलंबन रद्द होने के फैसले पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, मैं बहुत खुश हूं कि यह निलंबन रद्द हो गया है, क्योंकि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की आवाज सदन के भीतर गूंजना जरूरी है।
सांसदों की वापसी के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी के वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस निलंबन वापसी के पीछे दो बड़े समझौतों का दावा किया है। उनके अनुसार, विपक्ष ने इन शर्तों को स्वीकार किया है।
तथ्यहीन बयानबाजी पर रोक
पहला समझौता यह हुआ है कि, विपक्ष के नेता सदन के भीतर अब अनर्गल, बेबुनियाद और तथ्यहीन बातें नहीं करेंगे। वे बकवास बातों के बजाय तर्कपूर्ण और शांतिपूर्ण व्यवहार के साथ चर्चा में शामिल होंगे।
सदन की मर्यादा बनाए रखें
दूसरा अहम समझौता यह हुआ है कि, विपक्षी सांसद अब ‘वेल’ में आकर सत्ता पक्ष की तरफ नहीं बढ़ेंगे। साथ ही, कागज फाड़कर फेंकना, लोकसभा की मेजों पर चढ़कर उत्पात मचाना और अधिकारियों के साथ अभद्रता करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
निशिकांत दुबे ने अपनी पोस्ट में कड़े शब्दों में कहा कि जनता ने हमें संसद में वाद-विवाद के लिए भेजा है न कि उत्पात मचाने के लिए। लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखना हर सांसद की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बता दें कि, बजट सत्र के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ था। आरोप था कि, इन सांसदों ने कार्यवाही में बाधा डाली और अध्यक्ष की ओर कागज के गोले बनाकर फेंके। इसके बाद 7 कांग्रेस सांसदों और मदुरै से एक सीपीएम सांसद को निलंबित किया गया था।
इन्हें किया गया था निलंबित
- हिबी ईडन (कांग्रेस)
- अमरिंदर सिंह राजा वारिंग (कांग्रेस)
- मणिक्कम टैगोर (कांग्रेस)
- गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस)
- किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
- प्रशांत पाडोले (कांग्रेस)
- डीन कुरियाकोस (कांग्रेस)
- एस वेंकटेशन (सीपीएम, मदुरै)
विपक्ष ने शुरू से ही इस निलंबन को आवाज दबाने की कोशिश करार दिया था। हालांकि, अब निलंबन रद्द होने के बाद विपक्षी दलों का रुख थोड़ा नरम जरूर दिख रहा है, लेकिन उनका कहना है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरना जारी रखेंगे। मंगलवार को प्रस्ताव पारित होने के समय सदन में यह हिदायत भी दी गई कि भविष्य में यदि इस तरह का आचरण दोहराया गया, तो कार्रवाई और अधिक कड़ी हो सकती है।
संसद में सांसदों की वापसी से भले ही सदन की रौनक लौट आई हो, लेकिन बीजेपी द्वारा किए गए समझौतों के दावों ने नई चर्चा छेड़ दी है। क्या विपक्ष वाकई इन शर्तों पर कायम रहेगा? या फिर आने वाले दिनों में किसी अन्य मुद्दे पर सदन में फिर से तकरार देखने को मिलेगी? फिलहाल, सांसदों का निलंबन रद्द होना संसदीय कार्यवाही के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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