
वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगी देशों पर तीखा हमला बोलते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया है। ट्रंप ने खुलासा किया है कि, ईरान के साथ चल रही जंग के दौरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सुरक्षित करने और इसे खोलने के लिए उन्होंने कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन अधिकांश सहयोगियों ने इस मिशन में उनका साथ देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
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ट्रंप ने अपनाया सख्त लहजा
सहयोगी देशों के इस रुख से नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा, हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है। अमेरिका दुनिया का सबसे मजबूत और शक्तिशाली राष्ट्र है, हमारी मिलिट्री दुनिया की सबसे ताकतवर मिलिट्री है। अगर कोई साथ नहीं आता, तब भी हम अपने दम पर इस संकट से निपटने में सक्षम हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप लगभग होने की कगार पर है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि, उन्होंने करीब 7 प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और आग्रह किया था कि, वे अपने युद्धपोत होर्मुज में तैनात करें, ताकि तेल के जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके, लेकिन जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने भी इस सैन्य मिशन का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया।
ट्रंप ने खासकर ब्रिटेन के रवैये पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि, ब्रिटेन ने शुरुआती और सबसे संवेदनशील समय में दो एयरक्राफ्ट कैरियर देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब, जब कुछ मोर्चों पर स्थिति बदल रही है, तब वे मदद का ऑफर दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैंने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि, जंग के बीच में मुझे आपकी जरूरत थी, अब जब स्थिति हम खुद संभाल रहे हैं, तो मुझे आपके कैरियर की जरूरत नहीं है।
नाटो पर साधा निशाना
ट्रंप ने इस दौरान नाटो पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि, अगर सहयोगी देश संकट के समय एक-दूसरे की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे, तो नाटो का भविष्य बहुत बुरा होगा, नाटो की जरूरत खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि, वे सालों से कहते आ रहे थे कि, मुसीबत के समय ये देश साथ नहीं देंगे और आज उनकी यह बात सच साबित हो रही है।
बता दें कि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट हैं। वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद इसे रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए बंद कर दिया है। ईरानी सेना अब तक 15 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले कर चुकी है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों ने इस रास्ते से जहाजों को भेजना लगभग बंद कर दिया है।
ईरान ने दी चेतावनी
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि, जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, यह रास्ता बंद रहेगा। ईरानी मिलिट्री ने दुनिया को चेतावनी दी है कि, यदि अमेरिका ने जबरदस्ती रास्ता खोलने की कोशिश की, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी।

इस भीषण संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य हमला किया। इस मिशन को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया था। इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है क्योंकि इसमें ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं।
इस हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे। आलम ये रहा कि, कुछ ही दिन में ये संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित न रहकर पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गया। लेबनान, सीरिया और यमन के हूती विद्रोही भी इस युद्ध में कूद पड़े, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई है।
नेवी के जरिये निकालेगा अपने तेल के जहाजो
राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले दावा किया था कि, वह इस जंग को बहुत जल्द खत्म कर देंगे, लेकिन अब उनके स्वर बदलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि जंग जल्द तो खत्म होगी, लेकिन शायद इस हफ्ते नहीं। उन्होंने कहा कि वह अब सहयोगियों पर किसी भी तरह की हार्ड सेल (दबाव) नहीं डाल रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, उनका एटीट्यूड स्पष्ट है, अगर आप साथ आना चाहते हैं तो ठीक, वरना हमें किसी की जरूरत नहीं।
अब अमेरिका ने फैसला किया है कि, वह अपनी नेवी के जरिए अकेले ही तेल के जहाजों को सुरक्षा घेरा देना शुरू करेगा। हालांकि, कुछ एशियाई देशों के साथ अभी भी बातचीत चल रही है, लेकिन ज्यादातर देश इस युद्ध की आग में सीधे कूदने से बच रहे हैं। अमेरिका की इस लोन वॉरियर वाली छवि ने वैश्विक कूटनीति में एक नया शून्य पैदा कर दिया है, जिसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।
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