
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। सभी पार्टियां एक दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस भी बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध मारी करने की कोशिश कर रही है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी शुक्रवार 13 मार्च को लखनऊ के दौरे पर थे और यहां कांशीराम जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की, जिस पर अब बसपा मुखिया मायावती की प्रतिक्रिया आई है।
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मायावती के कांग्रेस पर किया प्रहार
आपको बता दें कि यूपी को सियासत में दलित वोट बैंक हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। हर पार्टी इन्हें अपने पाले में लाने में जुटी रहती है, इसके लिए तमाम तरह की योजनाएं भी चलाई जाती है। शनिवार 14 मार्च को भी सूबे की राजधानी लखनऊ में दलित राजनीति के दो दिग्गजों मायावती और राहुल गांधी के बीच वैचारिक और राजनीतिक जंग और तेज हो गई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस के अचानक कांशीराम प्रेम पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे चुनावी ढोंग करार दिया है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि, कांग्रेस की उसी दलित-विरोधी मानसिकता के कारण बहुजन समाज पार्टी का जन्म हुआ था, जो आज दिखावे के लिए कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर रही है।
1. जैसा कि सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने काफी वर्षो तक केन्द्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा व भारतीय संविधान के मूल निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कभी भी आदर-सम्मान नहीं किया और ना ही उनको ’भारतरत्न’ की उपाधि से भी सम्मानित किया। भला फिर यह पार्टी…
— Mayawati (@Mayawati) March 14, 2026
वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी ने कांशीराम जयंती के बहाने लखनऊ में दलितों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की और सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। बता दें कि, यूपी की 21 फीसदी दलित आबादी को साधने की यह होड़ आने वाले चुनावों के लिए निर्णायक साबित होने वाली है।
नीति और नियत पर उठाए सवाल
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कांग्रेस की नीति और नियत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, इतिहास गवाह है कि, कांग्रेस पार्टी ने कभी भी दलितों के मसीहा और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न से वंचित रखा। अब वही कांग्रेस कांशीराम को भारत रत्न देने की बात कर रही है, यह केवल राजनीतिक स्वार्थ है।
बसपा प्रमुख ने भावुक होते हुए उस दौर की याद दिलाई जब कांशीराम का निधन हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांशीराम का निधन हुआ, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन उन्होंने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। इतना ही नहीं, उस समय यूपी की तत्कालीन सपा सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित करने की जहमत नहीं उठाई थी। मायावती ने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि आज कई दल बीएसपी को कमजोर करने के लिए हथकंडे अपना रहे हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
कांशीराम जयंती कार्यक्रम कार्यक्रम में शामिल हुए राहुल
इससे पहले, शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित कांशीराम जयंती कार्यक्रम में राहुल गांधी ने दलितों के हक की बात करते हुए केंद्र सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने अपने 35 मिनट के भाषण में जितनी आबादी, उतना हक का नारा बुलंद किया। उन्होंने एक दिलचस्प दावा करते हुए कहा कि, यदि जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।
राहुल गांधी ने देश की संपदा और पदों पर भागीदारी का आंकड़ा पेश करते हुए कहा, बड़ी कंपनियों के CEO में दलित और पिछड़ों की मौजूदगी न के बराबर है। कोर्ट और न्यायपालिका में 15 प्रतिशत से अधिक एलीट क्लास का कब्जा है। वहीं दूसरी ओर मजदूरी और मनरेगा की लिस्ट में 85 फीसदी दलित और पिछड़े भरे हुए हैं।
राहुल ने आरोप लगाया कि, नरेंद्र मोदी संविधान की विचारधारा को नहीं मानते और उन्होंने देश को 15 फीसदी और 85 फीसदी के दो हिस्सों में बांट दिया है, जहां सारा फायदा सिर्फ मुट्ठी भर लोगों को मिल रहा है।
कांशीराम की विरासत पर कांग्रेस का दावा
लखनऊ के इस कार्यक्रम में कांग्रेस ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया। पार्टी ने मांग की है कि, कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। राहुल गांधी ने वादा किया कि वे संसद में इस मांग को जोर-शोर से उठाएंगे। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के इस कदम से साफ़ लग रहा है कि, वह अंबेडकर के साथ-साथ कांशीराम की विरासत पर भी अपना दावा ठोक रही है, जिससे मायावती असहज महसूस कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि, उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता दलित बहुल सीटों से होकर गुजरता है। आंकड़े बताते हैं कि, प्रदेश में लगभग 21 फीसदी दलित मतदाता हैं। यहां लगभग 130 ऐसी सीटें हैं ऐसी हैं जहां दलित आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है और वे किसी की भी जीत-हार तय कर सकते हैं। वहीं विधानसभा की 403 सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 84 आरक्षित सीटों में से 63 पर कब्जा जमाकर अपनी बादशाहत कायम की थी, जबकि सपा को केवल 20 सीटें मिली थीं। अब 2026 के चुनावी परिदृश्य में कांग्रेस इस समीकरण को बिगाड़ने के लिए कांशीराम कार्ड खेल रही है।
मायावती की बड़ी अपील
मायावती ने राहुल गांधी और कांग्रेस को चेताते हुए अपने समर्थकों से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि, 15 मार्च को कांशीराम की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में बसपा कार्यकर्ता बड़े कार्यक्रमों का आयोजन करें और कांग्रेस जैसी दोगली पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब दें। उन्होंने साफ किया कि, बसपा का गठन ही कांग्रेस की उपेक्षा और शोषण के खिलाफ हुआ था इसलिए बहुजन समाज कभी कांग्रेस का साथ नहीं देगा।
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