
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में इन दिनों रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लखनऊ, प्रयागराज और गोरखपुर समेत कई जगहों पर गैस सिलेंडर की सप्लाई धीमी होने की वजह से उपभोक्ताओं को बुकिंग के 5 से 7 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगने लगी हैं।
क्या हैं जमीनी हालत ?
लखनऊ की लालबाग गैस एजेंसी पर तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि एक ग्राहक की पासबुक फाड़े जाने के बाद काफी देर तक हंगामा होता रहा। वहीं गोरखपुर में लाइन में लगे लोगों का कहना है कि वे पिछले 2–3 दिनों से एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला। कई लोगों का कहना है कि हालात 15–20 साल पहले जैसे लगने लगे हैं, जब गैस सिलेंडर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था।
अधिकारियों ने क्या कहा ?
लखनऊ के जिला पूर्ति अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा — “घबराने की जरूरत नहीं है। जिले में 25 दिन का गैस कोटा उपलब्ध है।” गैस कंपनियों ने भी ग्राहकों को मैसेज भेजकर कहा कि किल्लत की खबरें भ्रामक हैं और देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है।
आखिर असली वजह क्या है?
दरअसल, तेल कंपनियों ने घटते स्टॉक के कारण कॉमर्शियल (व्यावसायिक) गैस सिलेंडरों की डिलीवरी पर अघोषित रोक लगा दी है। एजेंसियों को अभी सिर्फ घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे वालों पर पड़ा है, जिन्हें कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे।
आम लोगों पर क्या असर?
कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने की खबरों से आम लोगों में डर फैल गया है। कई शहरों में घरेलू सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। लोग जरूरत से ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं, जिससे सप्लाई पर और दबाव पड़ रहा है।
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसी वजह से बाजार में गैस की मांग अचानक बढ़ गई है और आम लोगों में भी चिंता का माहौल बन गया है।



