स्पीकर ओम बिरला पर नो-कॉन्फिडेंस मोशन, अखिलेश यादव ने खोला राज, बताया- ‘क्या करेंगे पार्टी के 37 सांसद’

लखनऊ। सोमवार 9 मार्च को संसद के बजट सेशन के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दलों के इस प्रस्ताव पर समाजवादी पार्टी के 37 सांसदों की भूमिका अहम होगी, क्योंकि इंडिया गठबंधन के हिस्से के रूप में सपा का समर्थन विपक्ष की ताकत बढ़ा सकता है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और कहा कि फ्लोर लीडर्स की मीटिंग में फैसला लिया जाएगा। यादव ने साथ ही केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी हमला बोला, जिसमें उन्होंने मध्य पूर्व संकट में फंसे भारतीयों की दुर्दशा को उठाया।

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 सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक झोंक 

बजट सेशन के पहले चरण में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी और अब दूसरे चरण में यह तनाव और बढ़ सकता है। लोकसभा में आज ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया जा सकता है, जिसके लिए विपक्षी सांसदों ने पहले ही नोटिस दिया है। कांग्रेस के तीन सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि  इस प्रस्ताव को पेश करेंगे। नियमों के मुताबिक, प्रस्ताव को सदन में विचार के लिए स्वीकार करने से पहले कम से कम 50 सांसदों को इसका समर्थन करना होगा। यदि इतने सदस्य खड़े होते हैं, तो प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग होगी।

अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, फ्लोर लीडर्स की मीटिंग होगी, जिसमें तय होगा कि आगे कैसे बढ़ना है। उन्होंने केंद्र की विदेश नीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा, बीजेपी सरकार में हमारी फॉरेन पॉलिसी गिरवी रख दी गई है। महंगाई बढ़ रही है और मध्य पूर्व में फंसे कई भारतीय नागरिक कई त्योहार नहीं मना पाए। भारत सरकार आखिर क्या कर रही है? यादव के इस बयान से साफ है कि, सपा इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ खड़ी हो सकती है, लेकिन अंतिम फैसला मीटिंग के बाद ही होगा। सपा के पास लोकसभा में 37 सांसद हैं, जो इंडिया गठबंधन की कुल ताकत में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप

विपक्षी दलों का आरोप है कि ओम बिरला ने सदन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। फरवरी 2026 में बजट सेशन के पहले चरण के दौरान, विपक्षी सांसदों का कहना था कि स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस में बोलने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा, आठ विपक्षी सांसदों को सस्पेंड करने और महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित टिप्पणियों का भी आरोप लगाया गया। इंडिया गठबंधन के दलों कांग्रेस, सपा, डीएमके, टीएमसी, लेफ्ट पार्टियां, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। फरवरी में ही 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे।

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तृणमूल कांग्रेस ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला लिया है। टीएमसी के सांसदों के वोट बिरला के खिलाफ जाएंगे, जैसा कि हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया है। टीएमसी की यह पोजिशन इंडिया गठबंधन को मजबूती देगी, क्योंकि ममता बनर्जी की पार्टी लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। हालांकि, फरवरी में टीएमसी ने अपनी पोजिशन स्पष्ट नहीं की थी, लेकिन अब वह प्रस्ताव के पक्ष में है।

50 सांसदों का समर्थन जरूरी

लोकसभा के नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है। यदि इतने सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े होते हैं, तो प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए स्वीकार हो जाता है। इसके बाद बहस होगी और वोटिंग। स्पीकर ओम बिरला इस दौरान सदन में मौजूद रह सकते हैं, अपना पक्ष रख सकते हैं और वोट भी कर सकते हैं, लेकिन वह चर्चा की अध्यक्षता नहीं कर पाएंगे। पीठासीन अधिकारी (डिप्टी स्पीकर या कोई अन्य) लोकसभा की कार्यवाही संभालेंगे। बिरला संभवत: सत्ता पक्ष की बेंच पर बैठेंगे, हालांकि नियम इस पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

सत्ता पक्ष ने इस प्रस्ताव को मूर्खतापूर्ण करार दिया है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि, अगर वे इसे लाते हैं, तो मूर्खता की हद पार कर देंगे। बीजेपी और एनडीए के पास लोकसभा में भारी बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना न के बराबर है। दोनों पक्षों ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। यदि 50 सांसद भी समर्थन में नहीं खड़े हुए, तो प्रस्ताव गिर जाएगा।

103 से ज्यादा सांसदों ने नोटिस पर किए साइन

गौरतलब है कि, इस प्रस्ताव का बैकग्राउंड फरवरी 2026 से जुड़ा है, जब विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया। फरवरी 9 को इंडिया ब्लॉक ने नो-कॉन्फिडेंस मोशन की योजना बनाई और अगले दिन 103 से ज्यादा सांसदों ने नोटिस पर साइन किए। राहुल गांधी, अभिषेक बनर्जी (टीएमसी), अखिलेश यादव और टीआर बालू (डीएमके) ने स्पीकर से मिलकर समाधान की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। फरवरी 10 को स्पीकर ने कहा कि वह सदन में नहीं बैठेंगे जब तक प्रस्ताव पर फैसला न हो जाए। सेशन का पहला चरण 13 फरवरी को खत्म हुआ और अब दूसरे चरण में यह मुद्दा फिर गरमाया है।

सपा की भूमिका अहम

सपा के 37 सांसद उत्तर प्रदेश से हैं, जहां पार्टी मजबूत है। अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं और विपक्षी गठबंधन के प्रमुख चेहरे हैं। सपा पहले भी स्पीकर के खिलाफ आवाज उठा चुकी है और अब यादव का बयान इशारा करता है कि पार्टी प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है। हालांकि, फ्लोर लीडर्स मीटिंग में सभी दलों के साथ चर्चा होगी। सपा ने बजट पर भी सरकार को घेरा है और उसे दिशाहीन करार दिया था।

बजट सेशन के दूसरे चरण में कई मुद्दे उठने की उम्मीद है, जिसे लेकर सदन में हंगामा हो सकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर मध्य पूर्व संकट पर बोलेंगे, जहां भारतीयों की सुरक्षा का सवाल है। विपक्ष इंडो-यूएस ट्रेड डील, एलपीजी मूल्य वृद्धि और अर्थव्यवस्था पर भी बहस चाहता है। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र ममता बनर्जी की सरकार पर भी निशाना साध सकता है। स्पीकर मोशन के अलावा, संसद में 60 देशों के साथ आउटरीच इनिशिएटिव की घोषणा भी हो सकती है।

सदन की कार्यवाही पर सबकी नजर

विपक्ष का कहना है कि, स्पीकर का पद निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में पक्षपात देखने को मिला। कांग्रेस सांसद सुकदेव भगत ने कहा, स्पीकर ने पक्षपात किया, इसलिए मोशन जरूरी है। वहीं, सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की हताशा बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मोशन सिम्बॉलिक है, लेकिन विपक्ष को एकजुट रखने में मदद करेगा।

संसद में आज की कार्यवाही पर सबकी नजरें हैं। यदि प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो हंगामा तय है। सपा के सांसदों का फैसला मीटिंग के बाद साफ होगा, लेकिन अखिलेश के बयान से लगता है कि विपक्ष एकजुट रहेगा। सरकार की मैजोरिटी से मोशन फेल हो सकता है, लेकिन यह संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ घटना होगी। स्पीकर पद पर ऐसा मोशन पहले कभी सफल नहीं हुआ, लेकिन यह विपक्ष की रणनीति को मजबूत करेगा।

 

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