यूपी में एक्टिव हुए RSS प्रमुख, 15 दिनों में दूसरी बार आ रहे लखनऊ, तेज हुई राजनीतिक हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी करीब एक साल दूर हैं, लेकिन सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, जहां पार्टी को अति-आत्मविश्वास और जनप्रतिनिधियों के जनता से कटने का खामियाजा भुगतना पड़ा। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी के बीच समन्वय बढ़ता दिख रहा है।

इसे भी पढ़ें- गुजरात से पकड़े गए तीन आतंकियों के निशाने पर था RSS का लखनऊ हेडक्वार्टर

सरस्वती कुंज मे होगी बैठक

संघ प्रमुख मोहन भागवत पिछले कुछ हफ्तों में लगातार उत्तर प्रदेश की यात्रा पर हैं और अब 15 दिनों में दूसरी बार लखनऊ पहुंच रहे हैं। रविवार को लखनऊ के सरस्वती कुंज में उनकी महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। सूत्रों के अनुसार, भागवत एक मार्च की सुबह दिल्ली से लखनऊ पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे निरालानगर स्थित संघ कार्यालय जाएंगे। शाम को दिल्ली वापसी की संभावना है, हालांकि कुछ सूत्रों का दावा है कि वे शनिवार शाम को ही पहुंच सकते हैं।

CM YOGI

बैठक से पहले शनिवार को निरालानगर सरस्वती कुंज में विशेष समीक्षा बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल और संघ के सह-कार्यवाहक मनमोहन वैद्य शामिल हुए। बैठक करीब ढाई घंटे चली, जिसमें 2027 चुनाव की रणनीति, सामाजिक समीकरण, सरकार-संघ समन्वय और संगठनात्मक तैयारियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मोहन भागवत का यह फरवरी में उत्तर प्रदेश का तीसरा दौरा है। इससे पहले 16 फरवरी को वे गोरखपुर से लखनऊ पहुंचे थे, जहां 18 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी करीब 40 मिनट की मुलाकात हुई। इसके अलावा दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से अलग-अलग 30-30 मिनट की बैठकें हुईं। इससे पहले वे मेरठ भी गए थे। इन दौरों से साफ है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संघ प्रमुख काफी एक्टिव हैं। उनकी लगातार सक्रियता ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है।

2027 की बन रही रणनीति?

सवाल उठ रहा है कि आखिर उनकी प्रदेश में इतनी दिलचस्पी क्यों है? क्या लोकसभा 2024 वाली गलती दोहराने से बचने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है?

आपको बता दें कि, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में 33 सीटें मिलीं, जबकि 2019 में 62 सीटें मिली थीं। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से बीजेपी की रणनीतिमें जबरदस्त सेंध लगाई थी। बीजेपी को अति-आत्मविश्वास, स्थानीय नेताओं की दूरी और सामाजिक समीकरणों पर कम ध्यान देने का नुकसान हुआ था। अब 2027 में बीजेपी फिर से पूर्ण बहुमत की कोशिश में है, जबकि विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ता से बीजेपी को हटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के दौरे इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। वे प्रदेश के विभिन्न कार्यक्रमों में सनातन संस्कृति को प्रमुखता देते हुए जातीय बंटवारे की राजनीति पर प्रहार कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने कई बार स्पष्ट किया है कि, संघ बीजेपी के आंतरिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन संगठनात्मक इनपुट देता है। बीजेपी के लिए संघ का यह इनपुट चुनावी रणनीति में अहम साबित होता रहा है।

सीएम योगी ने की समीक्षा बैठक

शनिवार की समीक्षा बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संघ प्रमुख के आगामी दौरे की तैयारियों पर फोकस किया। बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में लोकसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण, सामाजिक समीकरणों का जमीनी सर्वे, हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने की रणनीति, पीडीए फॉर्मूले का जवाब और 2027 के लिए बूथ स्तर की तैयारियों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय से ही पार्टी फिर से मजबूत वापसी कर सकती है।

CM

रविवार के दौरे में मोहन भागवत के बीजेपी  प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, सीएम योगी और संगठन महामंत्री धर्मपाल से मुलाकात की संभावना है। कार्यक्रमों की आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन बैठक सरस्वती कुंज में होने की पुष्टि हुई है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि, इन बैठकों में 2027 चुनाव की मास्टर स्ट्रैटेजी, सामाजिक समीकरणों का बैलेंस, हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने के तरीके और विपक्षी एकजुटता का जवाब तैयार किया जा रहा है।

साफ होगा केंद्र का रास्ता

उल्लेखनीय है कि, आरएसएस हमेशा से बीजेपी का वैचारिक आधार रही है। 2027 में जहां विपक्ष पीडीए फॉर्मूले पर जोर दे रहा है, वहीं बीजेपी हिंदुत्व, विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दों पर खेलने की तैयारी में है। मोहन भागवत की सक्रियता इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। उनकी यात्राएं संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में जोश भरने और जमीनी फीडबैक लेने का काम कर रही हैं।

2027 यूपी विधानसभा चुनाव उत्तर भारत की सियासत के लिए निर्णायक होगा। अगर बीजेपी  फिर से पूर्ण बहुमत हासिल करती है तो मोदी 3.0 के लिए रास्ता साफ होगा, वहीं विपक्ष की जीत केंद्र में भी बदलाव ला सकती है। ऐसे में संघ प्रमुख के लखनऊ दौरे और सीएम योगी संग बैठकों को चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

 

इसे भी पढ़ें- संविधान दिवस पर मणिकम टैगोर का हमला: RSS को अपना इतिहास याद रखना चाहिए

Related Articles

Back to top button