अफगान तालिबान और उससे संबद्ध आतंकी समूहों के करीब 300 लड़ाके मारे गए : पाकिस्तान

मंत्री ने अफगान तालिबान शासन का संक्षिप्त विवरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आपरेशन गजब-लिल-हक के दौरान उनकी 89 चौकियों को नष्ट कर दिया और 18 अन्य पर कब्जा कर लिया, जबकि लगभग 135 टैंक और बख्तरबंद वाहन भी नष्ट कर दिए गए।

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि अफगान तालिबान और उससे संबद्ध आतंकवादी समूहों के लगभग 300 लड़ाके उनके खिलाफ जारी अभियान में मारे जा चुके हैं। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने देर रात दी गयी अद्यतन जानकारी में बताया कि सुरक्षा बलों ने अफगान तालिबान शासन के 297 लड़ाकों को मार गिराया और 450 से अधिक लड़ाके घायल हो गए हैं।

मंत्री ने अफगान तालिबान शासन का संक्षिप्त विवरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आपरेशन गजब-लिल-हक के दौरान उनकी 89 चौकियों को नष्ट कर दिया और 18 अन्य पर कब्जा कर लिया, जबकि लगभग 135 टैंक और बख्तरबंद वाहन भी नष्ट कर दिए गए। उन्होंने बताया कि वायुसेना ने अफगानिस्तान के करीब 29 स्थानों को भी प्रभावी ढंग से निशाना बनाया।

पाकिस्तान ने यह बड़ा जवाबी हमला तब शुरू किया, जब अफगानिस्तान ने 2,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर एक साथ 53 स्थानों पर हमला किया था। शुक्रवार शाम आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के बीच चुनाव करना होगा।

उन्होंने कहा, मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि दमनकारी अफगान तालिबान शासन को स्पष्ट निर्णय लेना होगा। उन्हें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, बलूच लिबरेशन आर्मी, दाएश, अल-कायदा और अन्य आतंकवादी संगठनों तथा पाकिस्तान के बीच किसी एक को चुनना होगा। उन्होंने कहा, उन्हें यह फैसला करना ही होगा। पाकिस्तान सरकार यह पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। यह कोई नयी बात नहीं है। उन्हें तय करना होगा कि वे आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को चुनते हैं या पाकिस्तान को।

हमारी पसंद बिल्कुल स्पष्ट है। हर स्थिति में पाकिस्तान पहले रहेगा। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी समूहों को अपनी सरजमीं का इस्तेमाल रहने, प्रशिक्षण देने और हमलों की योजना बनाने के लिए करने देता है। अफगान पक्ष इन आरोपों को खारिज करता रहा है और पाकिस्तान से कहता है कि वह अपने देश के अंदर की समस्याओं को सुलझाने के लिए चरमपंथियों से बातचीत करे।

इस बीच, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने आतंकवाद के खिलाफ किस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने शुक्रवार को पाकिस्तान की विदेश मंत्री आमना बलूच से बात की तथा पाकिस्तान और तालिबान के बीच हाल में हुए संघर्ष में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार के प्रति समर्थन व्यक्त करते हैं।

तनाव बढ़ने के बीच अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की इच्छा भी जताई। अफगान विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कतर के उप विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खलीफी से फोन पर बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान हमेशा आपसी समझ और सम्मान के आधार पर मुद्दों को सुलझाने को प्राथमिकता देता है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी यही रुख दोहराते हुए कहा, अब हम भी इस मामले को संवाद के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं। तनाव कम करने के लिए क्षेत्र के अन्य देशों की ओर से भी कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर मध्यस्थता की पेशकश की। उन्होंने कहा कि ईरान दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब और कतर भी शांति स्थापित कराने के प्रयासों में लगे हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन रहान ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा फगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर मुत्ताकी से बातचीत की है। तुर्किये भी दोनों पक्षों के संपर्क में है और तनाव समाप्त कराने के प्रयास कर रहा है।

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