
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से प्रतिनिधित्व करने वाले उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास, ऑफिस और अन्य ठिकानों पर आयकर विभाग ने दो दिनों से अधिक समय तक चली छापेमारी में बड़ी सफलता हासिल की है।
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अन्य स्थानों पर जांच जारी
सूत्रों के अनुसार, उनके आवास और संबंधित स्थानों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई है, जबकि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जेवर और अन्य सामग्री जब्त की गई है। लखनऊ के विपुल खंड स्थित आवास पर कार्रवाई गुरुवार को समाप्त हो गई, लेकिन उनके ऑफिस, बलिया, सोनभद्र, कौशांबी, मिर्जापुर और प्रयागराज सहित अन्य स्थानों पर जांच अभी भी जारी है।

यह छापेमारी बुधवार 25 फरवरी को सुबह करीब सात बजे शुरू हुई थी, जब आयकर विभाग की 50 से अधिक अधिकारियों वाली टीमें एक साथ 30 से ज्यादा ठिकानों पर पहुंचीं। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। विभाग ने टैक्स चोरी, बेनामी संपत्ति और अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच के तहत यह ऑपरेशन चलाया। विशेष रूप से सोनभद्र जिले में अवैध खनन से जुड़े दस्तावेज मिलने की सूचना है, जिसमें कई ब्यूरोक्रेट्स के नाम और उन्हें दी गई रकम का जिक्र है।
कैंसर से जूझ रहे हैं विधायक
उमाशंकर सिंह बसपा के वर्तमान विधानसभा में एकमात्र विधायक हैं। वे बलिया जिले की रसड़ा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। 55 वर्षीय सिंह पिछले कुछ वर्षों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और स्वास्थ्य कारणों से विधानसभा सत्रों में भाग नहीं ले पा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में उन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती का करीबी माना जाता है। व्यावसायिक रूप से उमाशंकर सिंह छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी और साईं राम इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों से जुड़े हैं, जो सड़क निर्माण और खनन कार्यों में सक्रिय हैं। उनके भाई, बेटे और करीबी ठेकेदारों जैसे फैजी और सीबी गुप्ता के ठिकानों पर भी छापे मारे गए। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 54 करोड़ रुपये बताई गई थी, जिसमें चल और अचल संपत्ति शामिल है।
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बराती बनकर पहुंचे अधिकारी
आयकर विभाग ने छापेमारी को गुप्त रखने के लिए खास रणनीति अपनाई। बलिया में उमाशंकर सिंह के आवास पर पहुंचने वाली टीम सरकारी वाहनों के बजाय बरातियों के अंदाज में गई। वाहनों पर ‘महेंद्र कुमार संग संगीता कुमारी’ जैसे शादी वाले स्टीकर लगाए गए, ताकि आसपास किसी को शक न हो। इसी चालाकी से अधिकारी बिना शोर-शराबे के सीधे ठिकाने तक पहुंचे और कार्रवाई शुरू कर दी।
लखनऊ के गोमतीनगर विपुल खंड स्थित आवास, छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी का कॉरपोरेट ऑफिस और वजीर हसन रोड पर करीबी ठेकेदार फैजी के ठिकानों को खंगाला गया। सोनभद्र में साईं राम इंटरप्राइजेज से जुड़े खनन कारोबारियों के ठिकाने भी निशाने पर रहे।यह छापेमारी मुख्य रूप से सोनभद्र जिले में अवैध खनन से जुड़ी मानी जा रही है। CAG की हालिया रिपोर्ट (2025 में जारी) में खुलासा हुआ था कि सोनभद्र में अवैध पत्थर, बालू और मोरंग खनन से राज्य सरकार को करीब 60 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।
तेज हुई राजनीतिक हलचल
रिपोर्ट में उमाशंकर सिंह से जुड़ी फर्मों का नाम लिया गया था। माना जा रहा है कि CAG रिपोर्ट के आधार पर ही आयकर विभाग ने यह बड़ा ऑपरेशन चलाया। जांच में अवैध खनन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिसमें कई अधिकारियों के नाम और उन्हें रिश्वत के रूप में दी गई रकम का जिक्र है। विभाग को शक है कि खनन कारोबार से हुई काली कमाई को बेनामी संपत्तियों और नकदी के रूप में निवेश किया गया है।
छापेमारी की खबर फैलते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि विधायक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह कार्रवाई अनुचित है। योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधायक जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं, फिर भी रेड की गई।
सपा ने उठाए सवाल
कुछ रिपोर्ट्स में मेडिकल स्टाफ को भी अंदर जाने से रोका जाने का आरोप लगा। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने चुप्पी साध रखी है। आयकर विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जांच में 1000 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी का संकेत मिला है।
छापेमारी के दौरान बरामद नकदी, दस्तावेज और डिवाइस की जांच से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। अगर ब्यूरोक्रेट्स या अन्य कारोबारियों का नाम सामने आया तो यूपी में नया राजनीतिक तूफान उठ सकता है। बसपा के लिए यह झटका है, क्योंकि उमाशंकर सिंह पार्टी के इकलौते विधायक हैं। 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह मामला दलित-बहुजन वोट बैंक पर असर डाल सकता है। आयकर विभाग की टीम गुरुवार को भी सक्रिय है। आगे की जांच से और खुलासे होने की संभावना है।
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