
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने यह ज्ञापन सौंपा।
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डुप्लिकेट वोटर जोड़ने का आरोप
ज्ञापन में मुख्य मांग है कि, जनपद बस्ती के बस्ती सदर विधानसभा सहित सभी विधानसभाओं में स्थाई रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नामों को भारतीय जनता पार्टी पदाधिकारियों के दबाव में बीएलओ से रोल बैक कराकर फिर से मतदाता सूची में दर्ज करने वाले ईआरओ और बीएलओ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि SIR प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी हो सके।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि, बस्ती सदर विधानसभा के पोलिंग बूथ संख्या 190 में मतदाता क्रमांक 102, 104, 105, 468, 475, 477, 469, 479 पर दर्ज मतदाताओं के नाम स्थाई रूप से डिलीटेड सूची में थे, लेकिन बीजेपी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के दबाव में ईआरओ ने बीएलओ से रोल बैक करवाकर इन नामों को फिर से मतदाता सूची में दर्ज करा दिया। इससे इन मतदाताओं के नाम डुप्लिकेट हो गए हैं।
बस्ती ही नहीं अन्य जिलों में भी हो रही धांधली
उदाहरण के तौर पर, ये नाम पोलिंग बूथ 102 के क्रमांक 194, 195, 196; बूथ 363 के 563, 565; और बूथ 387 के 477, 479 पर भी दर्ज पाए गए हैं। इसी तरह, पोलिंग बूथ संख्या 120, 151, 208, 183, 403, 404, 399, 216, 381, 387, 218, 102, 120, 151, 325, 168, 195, 187, 55, 177, 60, 130, 436 आदि में भी कई मतदाताओं के नाम स्थाई डिलीटेड सूची से रोल बैक करवाकर दोबारा जोड़े गए हैं। परिणामस्वरूप, इनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हो गया है, जो डुप्लिकेट वोटर्स की श्रेणी में आते हैं।समाजवादी पार्टी का दावा है कि यह समस्या केवल बस्ती तक सीमित नहीं है।
SIR प्रक्रिया पर न हो संदेह
जनपद बस्ती की सभी विधानसभाओं के साथ-साथ प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में भी बीजेपी के दबाव में ईआरओ द्वारा बीएलओ पर जोर डालकर ऐसे रोल बैक करवाए गए हैं। इससे मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर डुप्लिकेट एंट्रीज हो गई हैं, जो चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाती हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला बेहद गंभीर है। शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेकर जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि SIR प्रक्रिया पर कोई संदेह न रहे। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और राधेश्याम सिंह भी मौजूद रहे।
राजनीतिक दबाव से मुक्त हो SIR
उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग से अपेक्षा करती है कि, वह राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कार्य करे और मतदाता सूची को पूरी तरह स्वच्छ व सटीक बनाए। यह ज्ञापन ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चरम पर हैं। समाजवादी पार्टी ने पहले भी आरोप लगाया है कि SIR के जरिए विपक्षी दलों के समर्थक मतदाताओं खासकर PDA – पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि डुप्लिकेट या फर्जी एंट्रीज को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने हाल ही में ऐसी कई शिकायतों को खारिज किया है और कहा है कि डिलीटेड नाम मृतक, स्थाई प्रवासी या डुप्लिकेट के कारण हटाए गए हैं। हालांकि, सपा का कहना है कि बस्ती जैसे मामलों में साफ तौर पर राजनीतिक दबाव दिख रहा है।समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि, सभी डुप्लिकेट एंट्रीज की जांच हो, रोल बैक के आदेश देने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो और मतदाता सूची को फिर से सत्यापित किया जाए।
SIR को लेकर आमने-सामने हैं सपा-भाजपा
पार्टी का मानना है कि यदि ऐसे कदम नहीं उठाए गए तो आगामी चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है, जहां दोनों प्रमुख दल मतदाता सूची को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। सपा की यह शिकायत अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जांच के लिए भेजी गई है और जल्द ही इस पर कोई फैसला आने की उम्मीद है।
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