
नोएडा। गलगोटिया यूनिवर्सिटी में रोबो डॉग को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि इसे लेकर यूनिवर्सिटी ने बड़ा कदम उठाते हुए माफी भी मांग ली है। इसे लेकर यूनिवर्सिटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें कहा गया कि, उनके प्रतिनिधि ने गलत जानकारी दी, जिससे भ्रम फैला। साथ ही यूनिवर्सिटी ने आयोजकों के फैसले को स्वीकार किया और स्टॉल खाली कर दिया।
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रोबो डॉग ‘ओरियन’ नाम से किया प्रदर्शित
आपको बता दें कि, ये विवाद तब शुरू हुआ जब समिट के एक्सपो एरिया में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन पर एक रोबोटिक डॉग (रोबो डॉग) ‘ओरियन’ के नाम से प्रदर्शित किया गया। प्रोफेसर नेहा सिंह ने इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रोडक्ट बताते हुए पेश किया। जैसे ही इसका वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स इसे चीनी कंपनी Unitree Robotics के Go2 मॉडल से मिलता-जुलता बताने लगे। यह मॉडल कमर्शियल तौर पर उपलब्ध है और भारत में इसकी कीमत लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये है।

इसके बाद यूनिवर्सिटी पर ‘मेक इन इंडिया’ थीम वाले इस समिट में विदेशी प्रोडक्ट को स्वदेशी इनोवेशन बताने का आरोप लगने लगा, जिससे भारी आलोचना हुई। समिट में प्रदर्शित रोबो डॉग को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोलिंग का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने इसे इनोवेशन के नाम पर फरेब करार दिया।
राहुल ने केंद्र पर साधा निशाना
विवाद इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने भी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय AI समिट एक असंगठित PR स्पेक्टेकल बन गया है, भारतीय डेटा बिक्री के लिए, चीनी प्रोडक्ट्स प्रदर्शित कर रहे हैं। कांग्रेस ने इसे बेशर्मी करार देते हुए कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा किया गया।
Instead of leveraging India’s talent and data, the AI summit is a disorganised PR spectacle – Indian data up for sale, Chinese products showcased. https://t.co/5liaoX0XXp
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 18, 2026
सूत्रों ने बताया कि विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट एक्सपो से तुरंत स्टॉ खाली करने का आदेश दिया गया। पावर कट कर दी गई और बैरिकेड्स लगा दिए गये। यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि, फैकल्टी सदस्य समेत सभी को परिसर छोड़ना पड़ा। MeitY सचिव एस कृष्णन ने कहा कि समिट में असली और जेनुइन काम प्रदर्शित होना चाहिए, विवादास्पद एजेंसी को जनता को गुमराह नहीं करने दिया जाएगा।
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मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी
इधर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने बुधवार को आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर माफी मांगी। विज्ञप्ति में कहा गया, एआई समिट में हुई गड़बड़ी के लिए तहे दिल से माफी मांगते हैं। पवेलियन में तैनात हमारे प्रतिनिधियों में से एक को सही जानकारी नहीं थी। उन्हें प्रोडक्ट के टेक्निकल उत्पत्ति की जानकारी नहीं थी। उन्हें प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था, लेकिन कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने गलत जानकारी दी। हमने आयोजकों की भावनाओं को समझते हुए परिसर खाली कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि संबंधित प्रतिनिधि (प्रोफेसर नेहा सिंह) ‘ill-informed’ थीं और उन्हें मीडिया से बात करने की आधिकारिक अनुमति नहीं थी। उनका कोई जानबूझकर गलत दावा करने का इरादा नहीं था।

यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी रोबो डॉग को खुद बनाया या विकसित किया होने का दावा नहीं किया। यह छात्रों के लर्निंग टूल के रूप में ग्लोबली उपलब्ध टेक्नोलॉजी से एक्सपोजर के लिए प्रदर्शित किया गया था। विवाद के लिए खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि भ्रम फैलने के लिए माफी मांगते हैं।
यूजर्स ने किया ट्रोल
यूजर क्वेरी में ‘रोबो डॉग के बाद कोरियन सॉकर ड्रोन का विवाद बढ़ा’ का जिक्र है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स में मुख्य फोकस रोबो डॉग पर ही रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यूनिवर्सिटी पर अन्य प्रदर्शनों (जैसे सॉकर ड्रोन या अन्य AI टूल्स) को लेकर भी सवाल उठे हैं, जहां विदेशी टेक्नोलॉजी को स्वदेशी बताने का आरोप लगा। हालांकि, आधिकारिक तौर पर रोबो डॉग ही मुख्य विवाद का केंद्र रहा।
यह घटना भारत में AI और इनोवेशन प्रमोशन के नाम पर पारदर्शिता, रिसर्च एथिक्स और ‘मेक इन इंडिया’ के दावों पर सवाल खड़े करती है। समिट का उद्देश्य भारत की AI लीडरशिप दिखाना था, लेकिन यह विवाद उल्टा PR डैमेज का कारण बन गया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, ऐसी घटनाएं विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और असली इनोवेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है, न कि इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स को री-ब्रांड करने की। हालांकि, गलगोटिया यूनिवर्सिटी अब डैमेज कंट्रोल मोड में है, लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और मीम्स बनने लगे हैं।
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