नई दिल्ली: भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज और ओलंपिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि उनका शरीर अब एलीट स्तर के खेल की मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा है, इसलिए वह आगे बैडमिंटन खेलना जारी नहीं रख सकेंगी। लंदन ओलंपिक 2012 की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल ने आखिरी बार 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मैच खेला था। इसके बाद से वह करीब ढाई-तीन साल से प्रोफेशनल बैडमिंटन से दूर रहीं। लंबे समय से घुटने की समस्या उन्हें खेल से दूर रख रही थी।

पॉडकास्ट में खुद दी रिटायरमेंट की जानकारी
35 वर्षीय साइना नेहवाल ने एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्होंने दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था और इसीलिए उन्हें रिटायरमेंट की घोषणा करने की जरूरत नहीं लगी। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया था और अपनी शर्तों पर ही विदा लूंगी। अगर आप और खेलने में सक्षम नहीं हैं तो कोई बात नहीं।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके घुटने की गंभीर खराबी के कारण लगातार हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग करना संभव नहीं रहा।
घुटने की चोट ने लिया करियर का फैसला
नेहवाल ने बताया कि उनका कार्टिलेज पूरी तरह खराब हो गया है और उन्हें आर्थराइटिस की समस्या है। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता और कोच को यह बात पता होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने खुद कहा कि अब यह और करना संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में सबसे अच्छा बनने के लिए आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग करनी होती है, लेकिन अब उनका घुटना एक या दो घंटे में ही जवाब दे देता था।
ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी
साइना नेहवाल वह पहली भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने बैडमिंटन में ओलंपिक कांस्य पदक जीता। इसके अलावा वह 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 प्लेयर भी रहीं। उन्होंने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2008 जीती और सुपर सीरीज खिताब (इंडोनेशिया ओपन 2009) अपने नाम किया। 2010 और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता, और यह रिकॉर्ड है कि वे इन खेलों में दो सिंगल गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार (2009), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2010), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) जैसे सम्मान दिए हैं।
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