नई दिल्ली: ईरान में 19 दिन तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की कड़ी कार्रवाई में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा के दौरान लगभग आठ दिनों तक इंटरनेट बंद रहा, और अब सेवाओं में मामूली बहाली के संकेत मिले हैं।

HRANA की रिपोर्ट में दावे
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने पुष्टि की है कि 3,090 मौतें हुई हैं, जिनमें करीब 2,885 लोग प्रदर्शनकारी बताए जा रहे हैं। संगठन के अनुसार, यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का सबसे घातक आंतरिक संघर्ष है। ईरानी सरकार का दावा है कि हिंसा में शामिल लोग हथियारबंद दंगाई थे, न कि आम प्रदर्शनकारी, और इनके पीछे अमेरिका और इजराइल का समर्थन था।
तेहरान में शांति, डर का माहौल
राजधानी तेहरान में पिछले चार दिनों से हालात अपेक्षाकृत शांत हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बड़े प्रदर्शन नहीं दिखे, लेकिन सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी जारी है। ड्रोन निगरानी अभी भी चल रही है, जिससे आम लोग सहमे हुए हैं।
आठ दिन बाद इंटरनेट की आंशिक वापसी
करीब 200 घंटे के इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद शनिवार को इंटरनेट सेवाओं में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के मुताबिक, कनेक्टिविटी अभी भी सामान्य स्तर का सिर्फ 2% है। कुछ यूजर्स के लिए इंटरनेट और SMS सेवाएं बहाल की गई हैं। तेहरान के पास कराज शहर के एक निवासी ने बताया कि शनिवार तड़के लगभग 4 बजे इंटरनेट लौटा। कराज वह क्षेत्र है जहां हिंसा सबसे ज्यादा हुई थी।
फांसी और गिरफ्तारी की खबरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने 800 से अधिक कथित फांसी की सजाओं को रद्द किया है। हालांकि, ईरानी सरकार ने इस बात की पुष्टि या खंडन नहीं किया। इस बीच, स्थानीय मीडिया ने कई गिरफ्तारी की खबरें दी हैं, जिनमें नाज़ानिन बरादरान का नाम शामिल है। उन पर निर्वासित नेता रज़ा पहलवी के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विदेशी नागरिक भी प्रभावित
ईरान में मौजूद भारतीय छात्र और तीर्थयात्री भी हालात से प्रभावित हुए हैं। कई लोगों ने बताया कि वे अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे थे और अधिकांश समय अपने ठिकानों तक सीमित रहे। भारत सरकार ने कहा है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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