500 वर्षों का इंतजार खत्म, राष्ट्रपति ने की ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, परिपूर्ण हुआ राम मन्दिर निर्माण

अयोध्या। उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या आज एक बार फिर इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज हो गई। दरअसल, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राम लला के दरबार पहुंचीं और प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली पर नवनिर्मित मंदिर के द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की विधि-विधान से स्थापना की। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के साथ ही सदियों से चले आ रहे राम मंदिर निर्माण का संकल्प अब अपनी पूर्णता को प्राप्त कर चुका है।

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सीएम योगी और राज्यपाल  ने किया स्वागत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या आगमन किसी उत्सव से कम नहीं था। आज जैसे ही उनका काफिला मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार पहुंचा, पूरी अयोध्या राममय हो गई।  राष्ट्रपति की अगवानी के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे और बड़े ही आत्मीयता से उनका स्वागत किया। सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजामों के बीच राष्ट्रपति ने पारंपरिक अंदाज में हाथ जोड़कर संतों और नागरिकों का अभिवादन स्वीकार किया।

Shri Ram Yantra

जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार से वे सीधे मंदिर के द्वितीय तल पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पहुंची और पूर्ण श्रद्धा के साथ विधि विधान से पूजा कर ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना की। यह यंत्र मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जा रहा है। काशी और अयोध्या के प्रकांड विद्वानों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस यंत्र को स्थापित किया गया।

भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है राम मन्दिर

श्री राम यंत्र की स्थापना को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा, प्रभु श्रीराम का मंदिर मात्र एक ढांचा नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। आज द्वितीय तल पर यंत्र की स्थापना के साथ ही मंदिर की दिव्यता और सुदृढ़ हुई है।

अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ-साथ राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ और तीन विशिष्ट आचार्य उपस्थित रहे। यंत्र की स्थापना के पश्चात राष्ट्रपति ने वहां पुष्प अर्पित किए और राष्ट्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

राष्ट्रपति ने लगाया ध्यान

इसे बाद राष्ट्रपति ने द्वितीय तल पर नवनिर्मित राम दरबार के दर्शन किए। यहां स्थापित प्रभु राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की अलौकिक प्रतिमाओं को देखकर वे भावुक नजर आईं। उन्होंने पूरे भक्ति भाव से रामलला की आरती उतारी और साष्टांग प्रणाम किया। राष्ट्रपति ने मंत्री परिसर में मौन हो कर  कुछ समय तक ध्यान भी लगाया, जो इस पल की गंभीरता और उनकी श्रद्धा को दर्शाता है।

Shri Ram Yantra

इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि, आज का दिन अयोध्या के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि 1984 के आंदोलन से लेकर अब तक, 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद अब मंदिर का निर्माण पूरी तरह से परिपूर्ण हो गया है।

कारसेवकों की आंखों में थे ख़ुशी के आंसू

इस अवसर पर उन संघर्षशील योद्धाओं को भी आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने 1984 से राम मंदिर आंदोलन की अलख जगाए रखी। पंडाल में बैठे इन कारसेवकों और पुराने कार्यकर्ताओं की आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए अयोध्या प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस सुरक्षा नीति अपनाई थी।

चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात थे और अत्याधुनिक तकनीक से कोने-कोने की निगरानी की जा रही थी।  इतनी सख्त पाबंदी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी, वे राम लला के दर्शन के लिए आतुर नजर और बेसब्री से अपनी पारी का इंतजार कर रहे थे। राष्ट्रपति के आगमन को देखते  हुए आज पूरी रामनगरी को फूलों और दीयों से सजाया गया था।

क्या है द्वितीय तल का महत्व

मंदिर का द्वितीय तल विशेष रूप से राम दरबार और अनुष्ठानिक कार्यों के लिए समर्पित है।

आज के इस कार्यक्रम में देश भर के प्रमुख संत और आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे उपस्थित रहे और इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने।

श्री राम यंत्र की स्थापना और राष्ट्रपति के आगमन की वजह से पूरी अयोध्या में शंखनाद और जय श्री राम के नारों की गूंज सुनाई दे रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह यात्रा न केवल एक राजकीय दौरा है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आस्था के सम्मान का प्रतीक है। श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही अयोध्या का यह भव्य मंदिर अब आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, वास्तुकला और धैर्य का जीवंत उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे नए भारत का उदय बताते हुए राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया।

 

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