
अयोध्या। राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी को लेकर मचे हो हल्ले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहली बार आधिकारिक बयान आया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने स्वीकार किया है कि, मंदिर से करीब तीन करोड़ रुपए के चढ़ावे की चोरी हुई है। अब तक चोरी की रकम को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब गिरी के इस कबूलनामे के बाद स्पष्ट हो गया कि कितनी रकम की चोरी हुई थी। हालांकि, 14 करोड़ के गहनों की चोरी के दावों को उन्होंने ख़ारिज कर दिया।
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अटकलों पर विराम
गोविंददेव गिरी ने यह भी साफ किया कि, मंदिर से चौदह करोड़ रुपए का सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान चोरी होने की जो बातें फैलाई जा रही थीं, वे पूरी तरह गलत हैं।

इससे पहले एसआईटी ने भी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में करीब अस्सी लाख रुपए की बरामदगी का ही जिक्र किया था। कोषाध्यक्ष के इस बयान के बाद चोरी की रकम को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा पहली बार है जब ट्रस्ट की तरफ से इतनी स्पष्टता के साथ आंकड़ा साझा किया गया है।
इस्तीफे की खबरों को बताया निराधार
पुणे यात्रा पर पहुंचे गोविंददेव गिरी ने ये बातें एक न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत के दौरान बताई। साथ ही उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर चल रहे कयासों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और न ही उन्होंने कभी इस्तीफे के बारे में कुछ कहा है। उनके अनुसार, उनके मन में इस तरह का कोई विचार भी कभी नहीं आया।
गोविंददेव गिरी ने आगे कहा कि, वे छत्रपति शिवाजी महाराज के अनुयायी हैं और मैदान छोड़कर भागने वालों में उनकी गिनती नहीं होती। उन्होंने इस्तीफे की चर्चा को महज एक निराधार अफवाह करार दिया और कहा कि इस तरह की बातों में कोई सच्चाई नहीं है।
महासचिव ने अपनी मर्जी से छोड़ा पद
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने यह भी बताया कि, ट्रस्ट के महासचिव ने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है। उन्होंने साफ किया कि, यह कहना बिलकुल गलत होगा कि, महासचिव को बलि का बकरा बनाया गया है। गोविंददेव गिरी के अनुसार, महासचिव को खुद इस बात का एहसास था कि, कहीं न कहीं कुछ लापरवाही ज़रूर हुई है। इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, महासचिव पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं डाला गया था। यह निर्णय पूरी तरह उनकी अपनी मर्जी से लिया गया था।
गोविंददेव गिरी ने कहा कि वे विशेष जांच दल की कार्यवाही से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने ये भी बताया कि, जांच में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। न ही किसी पर किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच को प्रभावित करने की कोई कोशिश भी नहीं हो रही है। पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से चल रही है।
उन्होंने आगे कहा कि, यह अपराध सीधे रामलला के खिलाफ किया गया है, इसलिए जिसने भी इस वारदात को अंजाम दिया है, उसे कानून के अनुसार कड़ी सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए। अपनी सादगी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आज वे पुणे में एक ऐसे साधारण घर में रहते हैं, जिसमें सिर्फ एक कमरा और एक रसोई है। उस घर की एक भी ईंट उनके नाम पर नहीं है।
22 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की अगली अहम बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। तय एजेंडे के अनुसार यह बैठक दो हिस्सों में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नए सदस्यों के चयन, जांच दल की रिपोर्ट और ट्रस्ट की पांचों समितियों में संभावित बदलावों पर चर्चा की जाएगी।
माना जा रहा है कि, ट्रस्ट को अपनी सभी पांच समितियों में फेरबदल करना पड़ सकता है, क्योंकि इन समितियों से जुड़े कई सदस्यों के पद फिलहाल खाली पड़े हैं। ऐसे में इस बैठक में नए सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
पांच समितियों में बदलाव की तैयारी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, बेहतर कामकाज सुनिश्चित करने के लिए कुल पांच समितियों का गठन किया गया है। इनमें निर्माण से जुड़ी समिति, वित्त से जुड़ी समिति, हिसाब-किताब की जांच वाली समिति, धार्मिक कार्यों की समिति और प्रबंधन से जुड़ी समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का गठन ग्यारह नवंबर सन दो हज़ार बीस को ट्रस्ट के गठन दस्तावेज़ के अनुसार किया गया था।

नियमों के मुताबिक हर समिति के अध्यक्ष को यह अधिकार है कि आवश्यकता पड़ने पर वे ट्रस्ट के बाहर से भी किसी विषय विशेषज्ञ को अपनी समिति में शामिल कर सकते हैं।
निर्माण से जुड़ी समिति में भी खाली हुए कई पद
निर्माण से जुड़ी समिति के अध्यक्ष एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी हैं, जो ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं। उन्होंने इस समिति में ट्रस्ट के सदस्यों के अलावा कई विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया था। इस समिति में ट्रस्ट के निवर्तमान महासचिव, एक अन्य वरिष्ठ न्यासी और अयोध्या के पूर्व राजपरिवार से जुड़े एक सदस्य भी शामिल थे।
अब महासचिव और उक्त न्यासी दोनों इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि राजपरिवार से जुड़े सदस्य के निधन के बाद उनका पद भी रिक्त हो गया है। ऐसे हालात में माना जा रहा है कि बाईस जुलाई को होने वाली बैठक में इन सभी खाली पदों को भरने और निर्माण समिति समेत बाकी समितियों में भी बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, राम मंदिर ट्रस्ट में हुई इस चोरी की घटना और उसके बाद हुए इस्तीफों ने पूरे मामले को काफी चर्चा में ला दिया है। हालांकि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और महासचिव का इस्तीफा स्वैच्छिक था, फिर भी आने वाली बैठक में लिए जाने वाले फैसले यह तय करेंगे कि ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा आगे किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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