
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2025 बैच के 21 युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा होने के साथ ही अब उन्हें प्रदेश के विभिन्न जनपदों में तैनात करने का निर्णय लिया गया है।
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जिलाधिकारी को करेंगे रिपोर्ट
यह निर्णय न केवल राज्य की प्रशासनिक क्षमता को विस्तार देगा, बल्कि युवा मेधा और नए दृष्टिकोण को भी सरकारी कामकाज का हिस्सा बनाएगा। इन अधिकारियों की तैनाती के संबंध में शासन के संयुक्त सचिव अरुणेश कुमार द्विवेदी की ओर से मंगलवार को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि, ये अधिकारी अब मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से निकलकर उत्तर प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी सेवा देंगे।
इस नई खेप के आने से प्रदेश के विभिन्न जिलों, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां विकास की असीम संभावनाएं हैं, प्रशासन को एक नया विजन मिलेगा। सरकार के आदेश के अनुसार, इन प्रशिक्षु अधिकारियों का प्रोफेशनल कोर्स फेज-1 आगामी 17 अप्रैल को समाप्त होने जा रहा है। इसके ठीक बाद ये सभी अधिकारी अपने आवंटित जिलों में पहुंचेंगे और वहां के जिलाधिकारी के समक्ष अपनी योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
जिलों में इन्हें असिस्टेंट मजिस्ट्रेट और असिस्टेंट कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनता से जुड़ने और शासन की नीतियों को लागू करने का पहला पायदान होता है। यह अवधि इन अधिकारियों के लिए महज एक प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक कड़ी परीक्षा की तरह होगी, क्योंकि इसी दौरान उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनकी निर्णय क्षमता के आधार पर उनके भविष्य की महत्वपूर्ण तैनातियां तय की जाएंगी। जिलों की सूची पर नजर डालें तो इसमें प्रदेश के हर कोने का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है।
किसे कहां मिलेगी पोस्टिंग
शक्ति दुबे को मुरादाबाद, कोमल पुनिया को इटावा और आदित्य विक्रम अग्रवाल को अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और रणनीतिक केंद्र की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मयंक त्रिपाठी कुशीनगर, हेमंत आगरा और संस्कृति त्रिवेदी हरदोई के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रिया सैनी और संगम नगरी प्रयागराज में शिवम सिंह को तैनात किया गया है।
तराई और बुंदेलखंड जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी युवा अधिकारियों को भेजा गया है, जिसमें शिवांश सुभाष जगाड़े को बलरामपुर, सलोनी गौतम को मथुरा, सिद्धार्थ सिंह को आजमगढ़ और श्वेता को राजधानी लखनऊ में तैनाती मिली है। इसके अलावा रेखा सियाक बांदा, आयुष जायसवाल अलीगढ़, अपूर्वा सिंह बस्ती और आयुष सैनी झांसी की कमान संभालेंगे। पूर्वांचल और औद्योगिक क्षेत्रों की कमान मुकुल खांडेलवाल गोरखपुर, थनीगैयारासन टी. अंबेडकरनगर, संदीप कुमार कानपुर नगर, रामभ्रोश सरन सहारनपुर और विद्यांशु शेखर झा बाराबंकी के हाथों में होगी।
जमीनी हकीमत को समझेंगे अधिकारी
इन अधिकारियों की सुगम रवानगी और जिलों में कार्यभार ग्रहण करने तक की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कार्मिक विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। शासन का यह कदम दर्शाता है कि वह इन युवा अधिकारियों के स्वागत और उन्हें बेहतर वातावरण देने के लिए पूरी तरह गंभीर है। फील्ड पोस्टिंग के दौरान इन प्रशिक्षु अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत को समझें। उन्हें राजस्व विवादों के निपटारे, विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जिला प्रशासन की मदद करनी होगी।
वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं को देखते हुए, इन अधिकारियों के कंधों पर भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। 17 अप्रैल के बाद जब ये 21 अधिकारी उत्तर प्रदेश के विभिन्न कलेक्ट्रेट में अपनी आमद देंगे, तो यह राज्य के लिए एक नई प्रशासनिक शुरुआत होगी। अकादमी की बंद दीवारों और फाइलों के अध्ययन के बाद अब उनके सामने वास्तविक समस्याएं, वास्तविक लोग और वास्तविक चुनौतियां होंगी।
यह देखना सुखद होगा कि मसूरी के प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को ये अधिकारी उत्तर प्रदेश की जटिल प्रशासनिक परिस्थितियों में किस प्रकार लागू करते हैं और राज्य के सर्वांगीण विकास में अपना क्या योगदान देते हैं। युवा जोश और अनुभवी जिलाधिकारियों के मार्गदर्शन का यह संगम निश्चित रूप से प्रदेश की जनता के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
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