
यरूशलेम। लंबे समय से सुलग रहे मिडिल ईस्ट में अब शांति की एक बेहद बारीक सी लकीर नजर आ रही है, लेकिन ऐसा कब होगा और कितने दिन के लिए होगा ये बड़ा सवाल होगा। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत मध्यस्थता के बाद इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू हो गया है। हालांकि, यह शांति किसी ठोस समझौते से ज्यादा एक अस्थायी राहत नजर आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वह सख्त रुख है, जिसने लेबनान और हिज्बुल्लाह की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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सीजफायर से पहले बमबारी
नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि, युद्धविराम के बावजूद इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के 10 किलोमीटर के दायरे में बने सिक्योरिटी जोन को खाली नहीं करेगी। इजरायल की यह सुरक्षात्मक शर्त अब इस पूरे शांति समझौते के गले की फांस बनती दिख रही है, क्योंकि लेबनान इसे अपनी संप्रभुता पर हमले के तौर पर देख रहा है।

सीजफायर की घोषणा और इसके लागू होने के बीच का समय बेहद खौफनाक रहा। युद्धविराम प्रभावी होने के ठीक कुछ घंटे पहले तक इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान में सैकड़ों ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इजरायली सेना का दावा है कि, ये हमले हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को तबाह करने के लिए किए गए थे ताकि सीजफायर के दौरान वे दोबारा सिर न उठा सकें।
दूसरी तरफ, लेबनानी सेना और स्थानीय प्रशासन ने अपने नागरिकों को अभी उन इलाकों में न लौटने की हिदायत दी है, जहां इजरायली सेना मौजूद है। जमीन पर हालात इतने नाजुक हैं कि, सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद छिटपुट गोलीबारी और उल्लंघन की खबरें सामने आने लगीं, जिससे यह डर बैठ गया है कि, क्या यह 10 दिन का ब्रेक वाकई किसी लंबी शांति में तब्दील हो पाएगा या यह सिर्फ अगली बड़ी जंग से पहले की खामोशी है।
इजराइली सैनिकों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं
इस पूरे विवाद की जड़ वह ’10 किलोमीटर का वह सिक्योरिटी जोन’ है जिसे नेतन्याहू अपनी सेना का सुरक्षा कवच मान रहे हैं। इजरायल का तर्क है कि, जब तक उसे यह यकीन नहीं हो जाता कि हिज्बुल्लाह उसकी उत्तरी सीमा से पीछे हट गया है, तब तक वह अपनी सेना को लेबनान की जमीन से पूरी तरह नहीं हटाएगा, लेकिन हिज्बुल्लाह और उसके समर्थक ईरान को इजराइल की ये शर्त किसी भी कीमत पर स्वीकार नही है।
हिज्बुल्लाह ने साफ संकेत दिए हैं कि, वह लेबनान की सरजमीं पर एक भी इजरायली सैनिक की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसे में ट्रंप की यह ऐतिहासिक पहल एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहां एक तरफ इजरायल की सुरक्षा गारंटी है और दूसरी तरफ लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की इतनी भारी कमी है कि समझौते की मेज पर बैठने से पहले ही बंदूकें दोबारा तन गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह सीजफायर उनकी कूटनीतिक साख का सवाल बन गया है। ट्रंप ने हिज्बुल्लाह और लेबनानी सरकार से इस मौके को न गंवाने की अपील की है और इसे मध्य पूर्व में शांति का ऐतिहासिक मौका करार दिया है। खबर है कि ट्रंप ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को व्हाइट हाउस भी आमंत्रित किया है ताकि एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के जरिए इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जा सके, लेकिन ट्रंप की राह आसान नहीं है, क्योंकि इसमें सिर्फ इजरायल और लेबनान ही शामिल नहीं हैं, बल्कि ईरान का प्रभाव इस खेल को और पेचीदा बना रहा है।
घरेलू दबाव में नेतन्याहू
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि, लेबनान में स्थायी शांति तभी संभव है जब इजरायल वहां से पूरी तरह बाहर निकले। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि बेंजामिन नेतन्याहू इस वक्त भारी घरेलू दबाव में भी हैं। इजरायल के उत्तरी हिस्से से पलायन कर चुके हजारों नागरिक तब तक वापस नहीं लौटना चाहते जब तक कि हिज्बुल्लाह का खतरा पूरी तरह टल न जाए, इसीलिए नेतन्याहू सुरक्षा क्षेत्र के मुद्दे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

वहीं लेबनान के लिए यह स्थिति अपमानजनक है, क्योंकि उसकी अपनी सेना अपनी ही जमीन के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है। अगर यह गतिरोध बना रहा, तो 10 दिन का यह युद्धविराम केवल एक सैन्य रणनीतिक ब्रेक बनकर रह जाएगा, जिसका इस्तेमाल दोनों पक्ष अपनी ताकत बटोरने के लिए करेंगे।
पहाड़ियों पर मंडरा रहे ड्रोन
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि, क्या 10 किलोमीटर का यह विवादित घेरा मध्य पूर्व में शांति का प्रवेश द्वार बनेगा या यह एक और विनाशकारी संघर्ष की शुरुआत होगी? फिलहाल, लेबनान की पहाड़ियों पर तैनात टैंक और आसमान में मंडराते ड्रोन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि, भले ही ट्रंप ने शांति की बिसात बिछा दी हो, लेकिन खेल के नियम अभी भी युद्ध के मैदान में ही तय हो रहे हैं।
यह सीजफायर वास्तव में एक ऐतिहासिक मौका है, बशर्ते इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं और लेबनान अपनी संप्रभुता के बीच एक ऐसा संतुलन बना सकें जो दोनों को स्वीकार्य हो। नहीं तो 10 दिन बाद मिडिल ईस्ट एक बार फिर से धधकता हुआ नजर आएगा।
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