
अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी केस में अब एक गया मोड़ आने वाला है। दरअसल, इस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी सोमवार, 20 जुलाई को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश करेगी। खबर है कि, जांच टीम ने अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है। बताया जा रहा है कि, जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल अभी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी।
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3 जजों की खंडपीठ ने की सुनवाई
इस पूरे मामले में बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए राम मंदिर में हो रही चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर विचार किया था। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक औपचारिक नोटिस भी जारी किया था।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी की अब तक की जांच प्रक्रिया को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया था। न्यायालय के इसी आदेश का पालन करते हुए एसआईटी 20 जुलाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट पेश करेगी। यह रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई होगी कि, अब तक की जांच में क्या-क्या तथ्य सामने आए हैं और आगे की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ाई जाएगी।
योगी सरकार से मांगा समय
गौरतलब है कि, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के इस मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी को शुरुआती जांच अवधि के बाद अतिरिक्त 15 दिनों का समय दिया गया था, ताकि टीम मामले की तह तक जाकर सभी जरूरी पहलुओं की पड़ताल कर सके। हालांकि यह अतिरिक्त समय-सीमा भी बुधवार 15 जुलाई को समाप्त हो चुकी है।
इसके बावजूद अभी तक इस अवधि को और आगे नहीं बढ़ाया गया है और न ही ऐसा होने की संभावना है। हालांकि, एसआईटी ने अपनी अंतिम और पूर्ण रिपोर्ट तैयार करने के लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त समय की मांग की है, जिससे यह जाहिर होता है कि जांच अभी अंतिम चरण में है और कुछ पहलुओं पर अभी और पड़ताल की जाने की आवश्यकता है।
इस पूरे मामले पर नजर रख रहे जानकारों का मानना है कि, एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर परिसर में हुई दान चोरी की घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही मंदिर की मौजूदा सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था में मौजूद खामियों को लेकर भी अहम जानकारियां उजागर हो सकती हैं।
बड़े खुलासे हो सकते हैं रिपोर्ट में
सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि, रिपोर्ट में सिर्फ चोरी की घटना तक सीमित न रहकर, मंदिर की समूची दान प्रबंधन प्रणाली की भी समीक्षा की गई है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं।
इसके अलावा यह भी चर्चा है कि, रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी कुछ अहम बातें सामने आ सकती हैं। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला
यह मामला सिर्फ एक कानूनी या प्रशासनिक विवाद भर नहीं है। इसका सीधा संबंध देश-दुनिया में रह रहे करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था से है। अयोध्या का राम मंदिर वर्षों के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद बनकर तैयार हुआ है। इसे भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मंदिर में चढ़ावे की चोरी जैसी घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी का माहौल भी पैदा किया।

यही वजह है कि, यह मामला शुरू से ही अत्यंत हाई-प्रोफाइल बना हुआ है। मीडिया से लेकर आम जनता तक, हर कोई इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना और स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करना, इस बात को और पुख्ता करता है कि यह मुद्दा कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
20 जुलाई पर टिकीं निगाहें
अब सबकी नजरें 20 जुलाई पर टिकी हैं, जब एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि, आगे जांच किस दिशा में बढ़ेगी और मंदिर ट्रस्ट को लेकर अदालत का अगला रुख क्या रहेगा। साथ ही, यह भी देखने लायक होगा कि राज्य सरकार एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए कितना और समय देती है। अंतिम रिपोर्ट में किन-किन बिंदुओं पर रोशनी डाली जाती है।
फिलहाल के लिए इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में और सुर्खियों में रहेगा, क्योंकि इसका संबंध न केवल कानून-व्यवस्था से है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
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