पर्यावरण, जैव विविधता बचाना सभी का समेकित दायित्व

 

अपडेटेड : 07 Jul 2019

अतुलेंद्र प्रताप सिंह

 अगर हमें भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो अपने इको सिस्टम पर ध्यान दें। आज शहरों की सफाई में जितना पैसा खर्च होता है, जब जनभागीदारी नहीं होती है, तो पूरा पैसा बर्बाद हो जाता है। स्वच्छता का अभियान तब तक निर्रथक है, जब तक कचरे का समुचित निस्तारण नहीं किया जाता है। बायो वेस्टेज कचरा नहीं है। इसे कचरे में मत बदलिए। यह बातें डीजी (टेक्निकल) श्री महेंद्र मोदी ने रविवार को कैफ़ी आज़मी आडिटोरियम में कहीं। वह चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से आयोजित जल, पक्षी, पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने आगे बताया कि बायो वेस्ट से तरल खाद बनाई जा सकती है। रासायनिक खाद और पेस्टीसाइड ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। बायो वेस्टेज से खाद बनाएंगे तो साथ फीसदी कचरा कम हो जाएगा। प्लास्टिक रिसाइक्लिंग के जरिए हम बाकी कचरे पर रोक लगा सकते हैं। उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर बाध्यता लगाई जाए कि वह अपने हिस्से की प्लास्टिक को उपभोक्ता से वापस लेकर रिसाइकिल करें। जल संरक्षण को अभियान बनाइए, हमारा जीवन सुगम और सुरक्षित होता जाएगा। उस तालाब का क्या मतलब है जिसमें एक बूंद पानी न हो। जिस तालाब में पानी नहीं भरता, उसे खुदवाने का क्या अभिप्रायः है। धरातल पर परिवर्तन करने में कौन सा मॉडल प्रभावी है, उस पर अमल करने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति और जल संरक्षण उत्सव कैसे मनाएं। इस पर भी हमने एक मॉडल तैयार किया है। यह सजावटी पेड़-पौधे अंग्रेजों की देन हैं, हमें भारतीय फलदार और छायादार पौधों को रोपने की पहल करनी चाहिए।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य सूचना आयुक्त श्री सुभाष चन्द्र सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगर हम नहीं चेते तो कुछ दिन बाद प्यास बुझाने के लिए भी चुल्लू भर पानी नसीब नहीं होगा। जब हम बिलकुल छोटे थे तो घरों में गौरैया खूब दिखती थीं। बचपन में गाय या भैंस मरती थीं, तो उनको खेतों में डाल दिया जाता है, ताकि पक्षी उसे खा सकें। उत्तर प्रदेश के आठ जिले पानी के संकट से जूझ रहे हैं। इसमें सोनभद्र को छोड़कर बाकी सातों जनपद बुंदेलखंड के आते हैं। बुंदेलखंड के सर्किट हाउस में भी राशनिंग व्यवस्था लागू है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल मंत्रालय बनाया। उन्होंने जल संचयन को लेकर अभियान शुरू किया है। इसका जिक्र इसलिए भी जरूरी है कि मोदी की कही गई बात लोगों को प्रभावित करती है। स्वच्छता को लेकर देश के विभिन्न समाजों का मानस बदल रहा है। जल संचयन के अभियान को हमें स्वभाव का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास, भोगवाद और भारतीय संस्कृति में जब टकराव हुआ, तब यह संकट खड़ा हुआ। प्रकृति का शोषण न करें, बल्कि उसका दोहन करें। आज स्थिति यह है कि संग्रह की प्रवृत्ति इस कदर बढ़ गई है, कि उसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई। खनन हुआ, गाद भरी और नदियों पर अस्तित्व संकट मंडराने लगा। नदियों प्राणदायिनी ही नहीं मोक्षदायिनी भी हैं, इसलिए उनकी रक्षा को प्रत्येक व्यक्ति तैयार होना चाहिए।

पुलिस आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण आयोग, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और पूर्व पुलिस महानिदेहक ने जल संरक्षण को लेकर व्यवहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की मुहिम हमें घर से शुरू करनी चाहिए। जितना पानी पीना हो, उतना ही गिलास में लें। किचन और बाथरूम का हल तभी खोलें जब बहुत जरूरी हो। घर के बाहरी हिस्से में गौरैया के लिए घोसले बनाएं। गौरैया सिर्फ एक पक्षी ही नहीं है, वह मौसम विज्ञानी भी होती है। कहा तो यहां तक गया है कि गौरैया घर में विपत्ति आने से पहले ही संकेत कर देती है। अनिष्ट की आशंका मात्र से यह पक्षी आपको संकेत कर देती है। प्रकृति संरक्षण की दिशा में समेकित काम करने की जरूरत है। लखनऊ और रायबरेली भी भीषण पानी संकट की चपेट में है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने कहा कि नगर को स्वस्छ और सुंदर बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए। जल, जंगल और पर्यवारण को बचाने की भागीदारी में जुटे कार्यकार्यताओं का सम्मान होना बहुत जरूरी है। हम जिन चीजों को जानते हैं और मानते हैं उनको स्वभाव में लाने की जरूरत है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन के लिए अभियान संचालित किया है। ऐसे में देश का नागरिक होने के नाते हमारी भूमिका भी देश के नवनिर्माण में अपना योगदान देना है। पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में जैव विविधता का संतुलन गड़बड़ा गया है। जैव संतुलन बना रहे, इसलिए यह जरूरी है कि हम सब अपने-अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की स्थायी व्यवस्था जरूर करें।

भाजपा नेता नीरज सिंह ने कहा कि हम युवाओं को सामाजिक जीवन में काम करने के दौरान हमेशा सार्थक पहल करनी चाहिए। एक छोटा सा प्रयास हम लोगों ने गाजियाबाद में किया था। हम मेहतर बनकर शहर, समाज और देश को बेहतर बनाने का प्रयास किया। जब आप समाज के किए सजग होते हैं, तो कारवां बन जाता है। गाजियाबाद में दस हजार से अधिक हम लोगों ने झोले वितरित करवाए। दिल्ली और गाजियाबाद के बॉर्डर पर कई तालाबों को हम लोगों ने उनका पुनुरुद्धार कराया। हम लोगों ने गाजियाबाद में करीब 23 हजार वाटर अलार्म मशीनें वितरित की हैं। छोटे-छोटे प्रयास हम लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। सीएसआर के माध्यम से लखनऊ नगर निगम को हम 27 ऐसे मशीनें देने वाले हैं, जिनसे 27 वार्डों में वेस्ट से कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। बुंदेलखंड ही नहीं, सौराष्ट्र में भी स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। जल की महत्ता समझे बगैर हम दुनिया में आगे बढ़ नहीं सकते हैं। 18 ऐसे नाले जो सीधे गोमती में गिरते हैं, उन पर हम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का काम कर रहे हैं। स्वस्थ और स्वच्छ देश के पुनर्निर्माण में हम सब अपना योगदान दें, इस संकल्प के साथ हम सब अपने-अपने घर जाएं।

इस दौरान मानस चिरविजय सांकृत्यायन ने अपने व्यावहारिक सुझाव बताए। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार की 21 करोड़ पौधे रोपने के अभियान में उनका लोगो चयनित किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से किया गया। संस्था की अध्यक्ष ओम कुमारी और संतोष कुमार पांडेय ने सफल संचालन किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने 51 विभूतियों का सभी अतिथियों ने सम्मान कर मान बढ़ाया गया।

 पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

 अगर हमें भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो अपने इको सिस्टम पर ध्यान दें। आज शहरों की सफाई में जितना पैसा खर्च होता है, जब जनभागीदारी नहीं होती है, तो पूरा पैसा बर्बाद हो जाता है। स्वच्छता का अभियान तब तक निर्रथक है, जब तक कचरे का समुचित निस्तारण नहीं किया जाता है। बायो वेस्टेज कचरा नहीं है। इसे कचरे में मत बदलिए। यह बातें डीजी (टेक्निकल) श्री महेंद्र मोदी ने रविवार को कैफ़ी आज़मी आडिटोरियम में कहीं। वह चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से आयोजित जल, पक्षी, पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने आगे बताया कि बायो वेस्ट से तरल खाद बनाई जा सकती है। रासायनिक खाद और पेस्टीसाइड ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। बायो वेस्टेज से खाद बनाएंगे तो साथ फीसदी कचरा कम हो जाएगा। प्लास्टिक रिसाइक्लिंग के जरिए हम बाकी कचरे पर रोक लगा सकते हैं। उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर बाध्यता लगाई जाए कि वह अपने हिस्से की प्लास्टिक को उपभोक्ता से वापस लेकर रिसाइकिल करें। जल संरक्षण को अभियान बनाइए, हमारा जीवन सुगम और सुरक्षित होता जाएगा। उस तालाब का क्या मतलब है जिसमें एक बूंद पानी न हो। जिस तालाब में पानी नहीं भरता, उसे खुदवाने का क्या अभिप्रायः है। धरातल पर परिवर्तन करने में कौन सा मॉडल प्रभावी है, उस पर अमल करने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति और जल संरक्षण उत्सव कैसे मनाएं। इस पर भी हमने एक मॉडल तैयार किया है। यह सजावटी पेड़-पौधे अंग्रेजों की देन हैं, हमें भारतीय फलदार और छायादार पौधों को रोपने की पहल करनी चाहिए।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य सूचना आयुक्त श्री सुभाष चन्द्र सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगर हम नहीं चेते तो कुछ दिन बाद प्यास बुझाने के लिए भी चुल्लू भर पानी नसीब नहीं होगा। जब हम बिलकुल छोटे थे तो घरों में गौरैया खूब दिखती थीं। बचपन में गाय या भैंस मरती थीं, तो उनको खेतों में डाल दिया जाता है, ताकि पक्षी उसे खा सकें। उत्तर प्रदेश के आठ जिले पानी के संकट से जूझ रहे हैं। इसमें सोनभद्र को छोड़कर बाकी सातों जनपद बुंदेलखंड के आते हैं। बुंदेलखंड के सर्किट हाउस में भी राशनिंग व्यवस्था लागू है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल मंत्रालय बनाया। उन्होंने जल संचयन को लेकर अभियान शुरू किया है। इसका जिक्र इसलिए भी जरूरी है कि मोदी की कही गई बात लोगों को प्रभावित करती है। स्वच्छता को लेकर देश के विभिन्न समाजों का मानस बदल रहा है। जल संचयन के अभियान को हमें स्वभाव का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास, भोगवाद और भारतीय संस्कृति में जब टकराव हुआ, तब यह संकट खड़ा हुआ। प्रकृति का शोषण न करें, बल्कि उसका दोहन करें। आज स्थिति यह है कि संग्रह की प्रवृत्ति इस कदर बढ़ गई है, कि उसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई। खनन हुआ, गाद भरी और नदियों पर अस्तित्व संकट मंडराने लगा। नदियों प्राणदायिनी ही नहीं मोक्षदायिनी भी हैं, इसलिए उनकी रक्षा को प्रत्येक व्यक्ति तैयार होना चाहिए।

पुलिस आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण आयोग, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और पूर्व पुलिस महानिदेहक ने जल संरक्षण को लेकर व्यवहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की मुहिम हमें घर से शुरू करनी चाहिए। जितना पानी पीना हो, उतना ही गिलास में लें। किचन और बाथरूम का हल तभी खोलें जब बहुत जरूरी हो। घर के बाहरी हिस्से में गौरैया के लिए घोसले बनाएं। गौरैया सिर्फ एक पक्षी ही नहीं है, वह मौसम विज्ञानी भी होती है। कहा तो यहां तक गया है कि गौरैया घर में विपत्ति आने से पहले ही संकेत कर देती है। अनिष्ट की आशंका मात्र से यह पक्षी आपको संकेत कर देती है। प्रकृति संरक्षण की दिशा में समेकित काम करने की जरूरत है। लखनऊ और रायबरेली भी भीषण पानी संकट की चपेट में है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने कहा कि नगर को स्वस्छ और सुंदर बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए। जल, जंगल और पर्यवारण को बचाने की भागीदारी में जुटे कार्यकार्यताओं का सम्मान होना बहुत जरूरी है। हम जिन चीजों को जानते हैं और मानते हैं उनको स्वभाव में लाने की जरूरत है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन के लिए अभियान संचालित किया है। ऐसे में देश का नागरिक होने के नाते हमारी भूमिका भी देश के नवनिर्माण में अपना योगदान देना है। पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में जैव विविधता का संतुलन गड़बड़ा गया है। जैव संतुलन बना रहे, इसलिए यह जरूरी है कि हम सब अपने-अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की स्थायी व्यवस्था जरूर करें।

भाजपा नेता नीरज सिंह ने कहा कि हम युवाओं को सामाजिक जीवन में काम करने के दौरान हमेशा सार्थक पहल करनी चाहिए। एक छोटा सा प्रयास हम लोगों ने गाजियाबाद में किया था। हम मेहतर बनकर शहर, समाज और देश को बेहतर बनाने का प्रयास किया। जब आप समाज के किए सजग होते हैं, तो कारवां बन जाता है। गाजियाबाद में दस हजार से अधिक हम लोगों ने झोले वितरित करवाए। दिल्ली और गाजियाबाद के बॉर्डर पर कई तालाबों को हम लोगों ने उनका पुनुरुद्धार कराया। हम लोगों ने गाजियाबाद में करीब 23 हजार वाटर अलार्म मशीनें वितरित की हैं। छोटे-छोटे प्रयास हम लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। सीएसआर के माध्यम से लखनऊ नगर निगम को हम 27 ऐसे मशीनें देने वाले हैं, जिनसे 27 वार्डों में वेस्ट से कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। बुंदेलखंड ही नहीं, सौराष्ट्र में भी स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। जल की महत्ता समझे बगैर हम दुनिया में आगे बढ़ नहीं सकते हैं। 18 ऐसे नाले जो सीधे गोमती में गिरते हैं, उन पर हम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का काम कर रहे हैं। स्वस्थ और स्वच्छ देश के पुनर्निर्माण में हम सब अपना योगदान दें, इस संकल्प के साथ हम सब अपने-अपने घर जाएं।

इस दौरान मानस चिरविजय सांकृत्यायन ने अपने व्यावहारिक सुझाव बताए। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार की 21 करोड़ पौधे रोपने के अभियान में उनका लोगो चयनित किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से किया गया। संस्था की अध्यक्ष ओम कुमारी और संतोष कुमार पांडेय ने सफल संचालन किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने 51 विभूतियों का सभी अतिथियों ने सम्मान कर मान बढ़ाया गया।

 

 

संबंधि‍त ख़बरें

लम्बे समय से बीमार चल रही दिल्ली की पूर्व CM शीला दीक्षित का आज निधन हुआ

  आराधना श्रीवास्तव सरकारी मंथन :    दिल्ली की पूर्व मुख्यमं... Read more...

कर्नाटक सरकार का होगा शक्ति परीक्षण

बेंगलुरु : कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों के 16 विधायकों के इस्ती... Read more...

पर्यवारण और जैव विविधता संरक्षण सभी का समेकित दायित्व

लखनऊ। पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। अगर हमें भारत को विश्वगुर... Read more...

अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली लोकसभा के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में ... Read more...